सागर/ डॉ. हरिसिंह गौर केन्द्रीय विश्वविद्यालय में वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए अत्याधुनिक प्रयोगशाला की बिल्डिंग का निर्माण पूरा किए बगैर ही लगभग 11 करोड़ रूपए के उपकरणों की खरीदी कर ली गई है। यह खुलासा लोकसभा में सांसद भूपेन्द्र सिंह के प्रश्न पर सरकार के जबाव से हुआ है।
सांसद भूपेन्द्र सिंह ने लोकसभा में प्रश्न कर जानना चाहा कि डॉ. हरिसिंह गौर केन्द्रीय विश्वविद्यालय में स्थापित की जा रही अत्याधुनिक प्रयोगशाला भवन की निर्माण लागत और निर्माण कार्यों की प्रगति का ब्यौरा क्या है। प्रयोगशाला के लिए क्रय किए गए उपकरणों के नाम और उनकी कीमत क्या है।
इनमें से कितने उपकरण प्रयोगशाला भवन मे स्थापित किए जा चुके हैं और कौन-कौन से उपकरण विश्वविद्यालय के विभिन्न भवनों में बंद पड़े हैं। मानव संसाधन विकास राज्यमंत्री डॉ. शशि थरूर ने भवन निर्माण से पहले ही खरीद लिए गए उपकरणोंं के संबंध में उक्त जानकारी देने से चुप्पी साधते हुए बताया है कि विश्वविद्यालय में वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए, विश्वविद्यालय ने 46 करोड़ रूपए की अनुमानित लागत से एक अत्याधुनिक इंस्ट्रूमेंटेशन प्रयोगशाला स्थापित करने का निर्णय लिया है।
जिसमें भवन निर्माण के लिए 25 करोड़ तथा उपकरणों के लिए 21 करोड़ रूपए खर्च किए जाना है। राज्यमंत्री ने बताया कि विश्वविद्यालय 10.93 करोड़ रूपए से अधिक मूल्य के उपस्कर (उपकरण) अधिप्राप्त कर चुका है। मैसर्स एचएससीएल दिल्ली के साथ निष्पादित संविदा के अनुसार कार्य का पहला चरण 30 जनवरी 2013 और दूसरा चरण 20 जुलाई 2013 तक पूरा किया जाना है।
देश में पशु चारे की भारी कमी
सांसद भूपेन्द्र सिंह के प्रश्न पर कृषि राज्यमंत्री चरणदास महंत ने बताया है कि पशु आहार और चारे के उत्पादन के संबंध में आंकलन प्रत्येक वर्ष नहीं कराया जाता। तथापि नाबार्ड कंसल्टेंसी सर्विसेज द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार वर्ष 2007 में सूखा चारा की मांग 416 मिलियन टन और उपलब्धता 253 मिलियन टन, हरे चारा की मांग 222 मिलियन टन तथा उपलब्धता 143 मिलियन टन रही है राज्यमंत्री के मुताबिक कृषि विभाग ने राज्यों को सलाह जारी की है कि वे फसल अपशिष्टों का कुशलतापूर्वक उपयोग और चारे की क्षति को रोकना सुनिश्चित करें।



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