शुक्रवार, 11 जनवरी 2013

रामकथा का समापन

बीना। कटरा मंदिर प्रांगण में चल रही रामकथा का नवमें दिन गुरूवार को समापन हो गया। कथा वाचक पंडित सुरेशानंद महाराज ने भगवान के राज्याभिषेक तक की महिमा का वर्णन किया।  उन्होनें बताया कि राम धर्म के प्रतीक हैं। रावण को अधर्म का प्रतीक माना गया है।

जब भी कभी युद्ध होता है तो हमेशा धर्म की जीत होती है। राम ने जो लड़ाई लड़ी वह धर्म के लिए थी और युगों-युगों तक समाज के लिए प्रेरणादायी रहेगी। उन्होनें भगवान राम के साथ माता सीता द्वारा किए गए धर्म के लिए त्याग की महिमा का भी वर्णन किया। 

अंतिम दिन कथा श्रवण करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। सभी ने कथा के दौरान भगवान राम के वनवास में लौटने एवं राज्याभिषेक के सजीव वर्णन का आनंद लिया। संगीतमय भजनों पर लोग अपने आप को झूमने से नहीं रोक सके। कथा का आयोजन अंजनी सेवा समिति द्वारा किया गया था। 

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