
बीना। चार पहिया एवं अन्य भारी वाहनों के कांचों पर काली फिल्म चढ़ाकर घूमने वालों पर शहर में कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने भी काली फिल्मों पर सख्त रवैया अपनाया था। पिछले माह दिल्ली में चलती बस में जो दरिंदगी हुई उसके कांच भी काली फिल्म से ढके थे।
इसके अलावा भी कई दुर्घटनाएं सामने आ चुकी हैं। सड़कों पर रहीसजादों की गाडि?ों एवं बसे काले शीशे चढ़ाकर सरपट दौड़ रही हैं। शहर में कई प्रशासनिक अधिकारी भी अपनी गाडि?ों में शीशे काली फिल्म युक्त लगाए हुए हैं। कोर्ट ने यह सख्ती इसलिए दिखाई थी क्योंकि काली फिल्म चढ़ाने के बाद अंदर क्या हो रहा है यह बाहर से दिखाई नहीं देता।
अपराधी इसका लाभ उठाकर अपहरण, बलात्कार जैसी संगीन वारदातों को अंजाम देते हैं। कई खतरनाक मामले उदाहरण के तौर पर सामने आ चुके हैं। पुलिस विभाग के शीर्ष अधिकारी भी शीशे से काली फिल्में हटाने के लिए कई बार निर्देश जारी किए हैं। लेकिन कोई कार्रवाई आज तक शहर में देखने को नहीं मिली है। लगता है अधिकारी किसी बड़़ी वारदात का इंतजार कर रहे हैं शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में सैकड़ों वाहन घूम रहे हैं।
दिनभर घूमती हैं बसें
काले शीशे चढ़ाकर घूमने वालों में बस मालिक भी पीछे नहीं हैं। बीना से सागर, खुरई, खिमलसा, कुरवाई, मालथौन आदि स्थानों को आने जाने वाली बसों के शीशे में इतना गाढ़ा रंग चढ़ा रहता है कि भीतर का कुछ भी नहीं दिखाई देता। ऐसे में अगर कोई अंदर वारदात हो तो कोई बाहर वालों से मदद की आस ही नहीं लगा सकता। कई स्कूल बसों एवं अन्य वाहनों की भी यही स्थिति है कई वाहन चालक दिन में ही सड़क किनारे काले कांचों का उपयोग कर शराबखोरी करते देखे जा सकते हैं।



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