शनिवार, 12 जनवरी 2013

वैज्ञानिक अभिमत देने के संबंध में चर्चा

सागर। न्यायिक व्यवस्था में फोरेंसिक विज्ञान की भूमिका पर आधारित तीन दिवसीय विशिष्ठ प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान शनिवार को दूसरे दिन विभिन्न गतिविधियां संपन्न हुर्इं।

प्रशिक्षण कार्यक्रम के प्रथम सत्र में एसके तिवारी संयुक्त निदेशक चेयर पर्सन के निर्देशन में डॉ. एसके शर्मा, ज्येष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी सीन आफ क्राइम से फांसी लगाकर आत्महत्या करना, जल के मर जाना पानी में डूब के मर जाना, चोरी व डकैती की घटनाओं के दौरान कत्ल कर दिया जाना आदि के घटनास्थलों की वैज्ञानिक जांच कर उन प्रकरणों को सुलझाना एवं इस प्रकार के प्रकरणों में शव का परीक्षण कर साक्ष्यों के आधार पर वैज्ञानिक अभिमत देने के संबंध में विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने अपने लंबे अनुभव काल में सुलझाए एक अत्यंत संवेदनशील तथा विचित्र प्रकृति के प्रकरणों के उदाहरण शव तथा घटना स्थल के वैज्ञानिक फोटोग्राफ सहित दिए। इस दौरान अन्य गतिविधियां भी संपन्न हुई। इस मौके पर शाखा प्रभारी बैलिस्टिक्स डीएस तोमर, चेयर पर्सन के निर्देशक एनएस चौधरी, डॉ. जेपीएन सिंह, बीसी चौधरी, केसी शर्मा ज्येष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी चेयर पर्सन आदि उपस्थित थे। संचालन डॉ. जेपी एन सिंह एवं पीके नागर ज्येष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी ने किया। 

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