सोमवार, 14 जनवरी 2013

शहर में हर्षोल्लास से मनाई गई मकर संक्रांति


सागर।  ऊर्जा, तेजस्वता और आस्था के पर्व मकर संक्रांति पर लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई। महाकुंभ के संयोग ने मकर संक्रांति पर्व का और महत्व बढ़ा दिया। सोमवार की दोपहर शुभ मुहूर्त होने पर जहां कुछ लोगों ने घर पर ही स्नान तो कुछ भक्तों की टोलियां शहर के आसपास क्षेत्रों में धार्मिक स्थलों पर स्नान करने पहुंची। 


स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने तिल, गुड़ और खिचड़ी का दान कर पुण्य लाभ लिया। शहर के मंदिरों में सुबह से ही भक्तों का तांता लग गया था। रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड पर भीड़ रही। भक्त बरमान तथा अन्य आसपास के क्षेत्रों जहां धार्मिक स्थल स्थापित हैं या नदी तालाब है वहां पहुंचे। 


ज्योतिषाचार्य रामप्रसाद शास्त्री के मुताबिक सोमवार भगवान सूर्य ने दोपहर 12.30 बजे के बाद मकर राशि में प्रवेश किया। श्रद्धालुओं ने इस शुभ मुहूर्त में शरीर में तिल के उपटन का स्पंदन कर, ऊँ सूर्य: नम: का जाप कर स्नान किया। 


खगोलीय घटना पर आधारित है पर्व


होली, दीवाली सहित सभी हिन्दू धर्म के पर्व जहां कथा पर आधारित होते हैं वहीं मकर संक्रांति पर्व खगोलीय घटना पर आधारित होता है। इस दिन सूर्य के पृथ्वी की परिक्रमा करने की दिशा बदलती है। इस बार यह मकर संक्रांति पर्व कई लिहाज से महत्वपूर्ण है। धनिष्ठा नक्षत्र कुंभ राशि तो होता ही है लेकिन इसबार महाकुंभ की स्थिति ने इस पर्व का धार्मिक महत्व बढ़ा दिया है। ऐसी मान्यता है कि इस खास मुहूर्त में शास्त्र-सम्मत, स्नान रोग- क्लेश, दुख: संताप हरते हैं। 


रेलवे स्टेशन एवं बस स्टैंड पर रही भीड़


मकर संक्रांति पर दोपहर 12 बजे के बाद स्नान का शुभ मुहूर्त होने के कारण क्षेत्र के श्रद्धालु टेÑन व बसों के माध्यम से जबलपुर के भेड़ाघाट एवं रानगिर जाने के लिए रेलवे स्टेशन और बस स्टैंड पर यात्रियों की काफी भीड़ रही। जहां कुछ लोगों ने घर पर ही स्नान कर पूजा अर्चना की वहीं कुछ श्रद्धालु एक दिन पूर्व ही पवित्र स्थान पर पहुंचकर स्नान किया। स्टेशन से गुजरने वाली प्राय: सभी गाड़ियों में काफी भीड़ रही। रेलवे टिकट के लिए भी लंबी-लंबी कतारें देखी गर्इं। साथ ही बस स्टैंड पर भी बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे।


घर पर बने पकवान मंदिर में भंडारा


मकर संक्रांति की मिठास बरकरार रहे इसको लेकर घरेलू महिलाओं ने भी सारी तैयारियां की थी। कामकाजी महिलाओं ने बाजार जाकर गुड़ तिली, लाई, काजू किसमिस, चना मूंगफल्लीदाने और मिठाई की जमकर खरीदारी की। शहर के कटरा बाजार में खूब खरीदारी हुई। घर जाकर महिलाओं ने गुड़ तिल के लड्डू, मूंगफल्ली पट्टी सहित मिष्ठान बनाए। वहीं आसपास के क्षेत्रों में मेले का भी आयोजन किया गया। चकराघाट पर श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शनों के साथ-अपने बच्चों को मेले में भी घुमाया और खरीदारी करवाई। 


टिकीटोरिया और घोघरा के जल प्रपात मे लगा मेला


रहली। मकर संक्रांति पर सुनार नदी के संगम तट पर नगरवासियो ने संगम घाट, सुरई घाट, मुडडा घाट मे डुबकियां लगाई तथा सूर्य को अर्ग दिया एवं मंगल कामना की। वही बहुत से लोगो ने घर पर स्नान किया नगर पालिका द्वारा स्नान करने के लिए विशेष जल सप्लाई की गई ताकि लोगो को स्नान के लिए गर्म और शुद्ध पानी मिल सके वही नगर के प्रसिद्ध स्थलो पर लोग पिकनिक मनाने गए। नगर से 10 किलोमीटर खेराना धाव के पास धोधरा नामक जल प्रपात पर कई जगह से लोग स्नान और जल प्रपात देखने आए। यहां मेले का भी आयोजन किया जाता है जिसे देखने के लिए दूर-दूर से एवं आसपास के गांव के लोग पहुंचे। टिकीटोरिया एवं रानगिर मे भी लोगो ने तालाब एव सुनार नदी मे डुबकियां लगाई एवं मां हरसिद्धि को जल ओर लड्डुओं का भोग लगाया। मकर संक्रांति पर बाजार की अधिकांश दुकाने बंद रही। टाईम पास करने के लिए कुछ दुकानदार दुकान खोले रहे। बैंक और सरकारी कार्यालयों में भी सन्नाटा पसरा रहा। आज के दिन सूर्य मकर राशि में प्रवेश करते है सूरज कुंड मे स्नान करने की अपनी परंपरा है। आज भी पुरानी परपरा निभाते पड़ोसी निभाते हैं। मकर संक्रांति पर हर घर में लड्डू बनते हे कई प्रकार के पकवान जिसे पड़ोसी अपने पड़ोसी के घर भिजवाते हैं। ताकि परस्पर स्नेह और प्यार परिवार की डोर की तरह संबंध बने रहे।

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