बांदरी। जैनधर्म शाला में धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री ने कहा कि अभिमानी व्यक्ति दूसरों को कुछ नहीं कर सकता। जब तक मान का विसर्जन नहीं करोगे स्वाभिमान नहीं आएगा, सम्मान नहीं मिलेगा। मानी अहं का विसर्जन करे तो अरहम बन जाएगा, खुद में एक मात्रा बढ़ाने से खुदा बन जाएगा अहं में एक रेफ लगाओ तो अर्हं बन जाओगे। मान को विनय से जीता जा सकता है।
रावण मानी था फिर भी राम ने विनय दिखाई लक्ष्मण को उसके पास भेजा कि रावण से कुछ ज्ञान प्राप्त कर लो। ज्ञानी में समपर्ण है मानी में अहं है। मान करने से नरक गति का बंध होता है, मान का त्याग करे अर्हं को ग्रहण करें। गुरू की भक्ति करें भगवान की अराधना करें। परम पूज्य अचल सागर जी महराज ने कहा कि जीवन में कठोरता आ गई संगति बिगड़ रही है नैतिकता संस्कार नहीं मिल रहे है बच्चो को वात्सल्य नहीं दिया जा रहा है तो कहां दिखेगे। व्यक्ति का निर्माण संस्कार के माध्यम से ही होगा बच्चो को शुरू से ही धर्म का ज्ञान महापुरूष को कथांए समझाए। धर्मसभा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।




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