सागर। राज्य न्यायालिक विज्ञान प्रयोगशाला तथा न्यायायिक अधिकारी प्रशिक्षण संस्थान मप्र उच्च न्यायालय जबलपुर के संयुक्त तत्वावधान में राज्य के विभिन्न न्यायालयों के मप्र उच्च न्यायिक सेवाओं के न्यायायिक अधिकारियों के लिए 11 से 13 जनवरी तक न्यायिक व्यवस्था में फोरेंसिक विज्ञान की भूमिका पर आधारित तीन दिवसीय विशिष्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला में प्रात: 10 बजे सुश्री प्रतिभा रत्नापारखी निवृत्तमान जिला एवं सत्र न्यायाधीश जिला न्यायालय सागर के मुख्य अतिथ्य में किया गया।
प्रयोगशाला के संयुक्त निदेशक एसके तिवारी ने बताया कि न्यायायिक अधिकारी प्रशिक्षण संस्थान, मप्र उच्च न्यायालय, जबलपुर द्वारा मप्र के समस्त न्यायायिक अधिकारियों को फोरेंसिक साइंस से संबंधित विशिष्ट प्रशिक्षण दिए जाने की जिम्मेदारी वर्ष 2015 तक राज्य न्यायालयिक विज्ञान प्रयोगशाला सागर को सौंपी गई है। इस श्रृंखला का यह पांचवा आयोजन है जिसमें मप्र के विभिन्न जिलों में पदस्थ स्पेशल जज एवं एडीजे स्तर के 38 न्यायायिक अधिकारीगण शामिल हुए।
निवृत्तमान जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रतिभा रत्नपारखी ने कहा कि मप्र में होने वाले नारकोटिक्स पदार्थों अफीम, गांजा आदि के अन्वेषण में एवं न्यायालय में चलने वाले मुकदमों में फोरेंसिक रिपोर्ट के महत्व के वास्तविक प्रकरणों के उदाहरण दिए जानमें एफएसएल रिपोर्ट से उन प्रकरणों को सुलझाया गया। उन्होंने एक विवादास्पद प्रकरण में जिसमें मोबाइल फोन पर रिकार्ड की गई आवाज के फोरेंसिक परीक्षण रिपोर्ट के आधार पर फैसला दिया गया था, से प्रकरण सुलझाने के उदाहरण भी बताए। इस कार्यक्रम में फोरेंसिक विज्ञान की दो नवीनतम विधाओं आवाज का परीक्षण एवं फोटो चेहरों का मिलान पर विशेष व्याख्यान पहली बार शामिल किए गए हैं।
डॉ. एमके वर्मा निदेशक एफएसएल ने बताया कि पूर्व में आयोजित इस प्रकार के सेमीनारों में प्रतिभागियों की अपेक्षाओं एवं उनके बताए अनुसार विशेष परिवर्तन किए गए हैं एवं व्याख्यानों के साथ-साथ संबंधित शाखाओं के विशेष डिमांसटेÑशन भी रखे गए हैं। ताकि प्रतिभागी न्यायाधीश संबंधित शाखाओं में स्वयं जाकर परीक्षण कार्य की बारीकियां समझ सकें।



कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें