शुक्रवार, 11 जनवरी 2013

श्रीमदभागवत कथा के अंतिम दिन उमड़ा भक्तों का सैलाब


बांदरी। ग्राम रोंड़ा में आयोजित की जा रही श्रीमदभागवत ज्ञान गंगा यज्ञ में शुक्रवार को रत्नेश्वरी देवी ने श्री कृष्ण - सुदामा के मिलन की भावुक कथा सुनाकर श्रोताओं को मुग्ध कर दिया। सैकड़ों श्रोताओं की पलकें भींग गईं। रत्नेश्वरी देवी ने इस मौके पर कहा कि मित्रता श्री कृष्ण - सुदामा  की तरह होना चाहिए।


उन्होंने कहा कि सुदामा गरीब ब्राह्मण थे। अपनी भूख से व्याकुल पत्नी के कहने पर वे अपने सखा श्री कृष्ण के पास गए। श्री कृष्ण  सुदामा को अपने पास पाकर अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने सुदामा का बहुत ही आदर - सत्कार किया । भगवान श्री कृष्ण और सुदामा एक दूसरे का हाथ पकड़कर अपने पूर्व के जीवन की आनंददायक घटनाओं का स्मरण करने लगे। सुदामा जी ने इस बीच बहुत ही संकोच में एक चिथड़े से बंधी पोटली दी। श्री कृष्ण भेंट पाकर अत्यंत खुश हो गए। साथ ही सुदामा जी को लक्ष्मीपति बनने का वरदान दिया।  इस मौके पर भागवत प्रवक्ता रत्नेश्वरी देवी पर फूलों की बारिश की गई। 


बुराइयों को छोड़ने का आह्वान किया


कथा में अंतिम दिन रत्नेश्वरी देवी ने दक्षिणा में केवल अपनी बुराइयों को छोड़ने का आव्हान किया। उन्होंने कहा कि जीवन में कभी मांस का सेवन न करें। नशा और गुटखे से दूर रहें। सभी गौमाता की रक्षा का भी संकल्प लें। आयोजन के दौरान मुख्य यजमान रामकिशन दुबे ने रत्नेश्वरी देवी को अभिनंदन पत्र भेंट किया। महंत चरणदास खुरई ने कहा कि रत्नेश्वरी देवी की कथा कराने में जिन भाई - बहिनों ने प्रत्यक्ष - अप्रत्यक्ष सहयोग दिया है, उसके लिए मैं आभारी हूं।

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