शुक्रवार, 8 मार्च 2013

मानवीय साक्ष्य कम विश्वनीय होते हैं: फारेंसिक रिपोर्ट में न्याय पालिका को भरोसा

सागर। शुक्रवार को राज्य न्यायालियक विज्ञान प्रयोगशाला में राज्य स्तरीय तीन दिवसीय प्रशिक्षण का उद्घाटन जिला एवं सत्र न्यायाधीश एचपी सिंह के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ। न्यायायिक अधिकारी प्रशिक्षण संस्थान, मप्र उच्च न्यायालय जबलपुर के संयुक्त तत्वावधान में राज्य के विभिन्न न्यायायिक अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

एचपी सिंह ने कहा कि आज के समय में मानव चरित्र का पतन हो चुका है मानव साक्ष्य की विश्वसनीयता कम हो रही है। अपराधी नए और आधुनिक तकनीकों का प्रयोग करते हैं। ऐसी स्थिति में न्यायालय का भरोसा वैज्ञानिक विषलेश्ण पर बढ़ता जा रहा है। न्यायाधीश निर्णय देते समय फारेंसिक रिपोर्ट पर भरोसा कर सकते हैं। न्यायालय में चलने वाले मुकदमों को एफएसएल रिपोर्ट से सुलझाया गया।

संयुक्त निदेशक एसके तिवारी ने कहा कि न्यायायिक अधिकारी प्रशिक्षण संस्थान मप्र के समस्त न्यायायिक अधिकारियों को विशिष्ट प्रशिक्षण दिए जाने की वर्ष 2015 तक राज्य न्यायालिक सागर प्रयोग शाला को सौंपी गई है। इसके तहत यह छटवा आयोजन है। जिसमें विभिन्न जिलों में पदस्थ स्पेशल जज, एडीजे स्तर के चालीस न्यायायिक अधिकारी शामिल हुए हैं।

अनोखे प्रकरणों के दिए उदाहरण

प्रशिक्षण कार्यक्रम में डॉ. केके अष्ठाना ने प्रेजेन्टेशन के माध्यम से अनोखे करीब 20 प्रकरणों के उदाहरण शव तथा घटना स्थल के वैज्ञानिक फोटोग्राफ सहित प्रस्तुत किए। उन्होंने बताया कि जल के मरजाना, रेल से कटना, पानी में डूब के मरना, चोरी व डकेती के घटनाओं के दौरान हत्या होना, फांसी लगाकर आत्म हत्या व हत्या होना पर विस्तार से चर्चा की।

सागर प्रयोगशाला की उपलब्धियां बताई

एफएसएल निदेशक डॉ. एमके वर्मा ने बताया कि पूर्व में आयोजित इस प्रकार के सेमीनारों में प्रतिभागियों की अपेक्षा अनुसार विशेष परिवर्तन किए गए हैं ताकि प्रतिभागी परीक्षण की बारीकियां समझे। डॉ. वर्मा ने प्रेजेन्टेशन के माध्यम से देश में फॉरेंसिक लेबों के विकास एवं वर्तमान स्थिति पर चर्चा की। साथ ही सागर एफएसएल प्रयोगशाला की उपलब्धियां भी बतार्इं। भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की गई। साइंस के क्षेत्र में आने वाली नई तकनीकों का उल्लेख किया गया। इस अवसर पर वैज्ञानिक राज श्रीवास्तव, डॉ. ज्योत्सना पांडे, डॉ. श्वाती श्रीवास्तव, पंकज श्रीवास्तव, डॉ. एमपी सिंह उपस्थित थे।

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