सागर। जनपद पंचायत मालथौन के अंतर्गत विगत दिनों 62 पंचायतों में रोजगार सचिव की भर्ती हुई थी। स्थानीय लोगों का आरोप है कि सीईओ ने मनमाने तरीके से एवं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर सचिवों का चयन किया है। सीईओ पर उच्चाधिकारियों का आदेश न मानने का भी आरोप है। सूचना के अधिकार की भी धज्जियां उड़ाई गर्इं। मामले में जनपद पंचायत के कर्मचारी भी नाखुश दिखे। कर्मचारियों ने इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों से की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
ग्राम पंचायत इटवा के भूपेन्द्र सिंह बबलू राजा के द्वारा सूचना के अधिकार के तहत सीईओ एमएम प्रजापति से जब प्रमाण पत्रों की जानकारी मांगी गई तो सीईओ ने जानकारी देने से इंकार कर दिया। फरियादी ने इसकी शिकायत जिलाधीश को आवेदन देकर कार्रवाई किए जाने की मांग की। कलेक्टर ने मालथौन तहसीलदार को आदेशित किया कि आवेदक को जनपद पंचायत मालथौन से रोजगार सचिव के दस्तावेजों की नकल दी जाए। लेकिन जब यह आदेश सीईओ के पास पहुंचा तो उन्होंने उच्चाधिकारियों के आदेश की परवाह ही नहीं की।
जनपद पंचायत मालथौन के सीईओ की कार्यप्रणाली सचिव नियुक्ति में संदेह के घेरे में रही है। लोगों का आरोप है कि नियुक्ति के लिए 5 सदस्यी टीम का गठन किया गया था। जिसमें सब इंजीनियर लक्ष्मण रिछारिया, बीआरसी, हाई सेकंडरी स्कूल के अध्यापक आनंद मिश्रा आदि शामिल थे। सीईओ ने इन पांच सदस्यी टीम को दरकिनार करते हुए सभी नियुक्ति अपने बलबूते पर करार्इं। मालथौन जनपद पंचायत अध्यक्ष गोपीराम अहिरवार ने सीईओ एमएम प्रजापति के रवैए को लेकर कलेक्टर, विधायक व जिला पंचायत में शिकायत की है। शिकायत पर अतिरिक्त जिला पंचायत सीईओ मंजू खरे जांच के लिए पहुंची लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
आरटीआई से नहीं दी जानकारी
इटवा के भूपेन्द्र सिंह, बबलू राजा, लल्लू राजा सहित अनेक लोगों ने आरटीआई के तहत जनपद पंचायत मालथौन से सचिव की नियुक्ति के दस्तावेजों की जानकारी सूचना के अधिकार के तहत मांगी लेकिन सीईओ ने कोई भी जानकारी देने से मना कर दिया। आवेदकों ने इसकी शिकायत कलेक्टर से की लेकिन फिर भी सीईओ ने उच्चाधिकारियों के आदेश का पालन नहीं किया। इस मामले में जब जिला पंचायत अतिरिक्त सीईओ मंजू खरे से फोन पर संपर्क किया गया तो वे भोपाल में मीटिंग में व्यस्त होने के कारण अपनी बात नहीं रख सकी। वहीं सीईओ मालथौन एमएम प्रजापति से संपर्क नहीं हो सका।



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