गुरुवार, 13 दिसंबर 2012

रिकार्ड जमा नहीं कर रहे पूर्व समिति अध्यक्ष

खुरई। खुरई के मिशन अस्पताल के पास 70 के दशक से मध्यमवर्गीय आय कर्मचारी सहकारी गृह निमार्ण समिति मर्यादित द्वारा कर्मचारियों के लिए गृह निर्माण कराया जा रहा है। इस कालोनी की समिति पर पिछले कई वर्षों से भ्रष्टाचार का आरोप लग रहा है।

कई कर्मचारी सदस्यों द्वारा लगातार शिकायतों के बाद भी उनके द्वारा उस कालोनी में पंजी कराए गए प्लाट तीस साल से ज्यादा बीत जाने के बाद भी मिलना तो दूर उनकी जानकारी तक पूर्व अध्यक्षों द्वारा नहीं दी जा रही है। सदस्य कर्मचारियों का आरोप है कि उनके प्लाट गैरकर्मचारी लोगों को मनमाने तरीके से बेचे जा रहे हैं। जबकि लम्बे अर्से से उनके सदस्यता शुल्क जमा होने के बाबजूद वे भटक रहे हैं।

लगातार मिल रहीं शिकायतों के बाद भी उप पंजीयक कार्यालय की ओर से कोई ठोस कार्रवाई अभी तक नहीं की गई है। सदस्यों द्वारा दर्जनों बार सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत जिला कार्यालय से जानकारी मांगी गई लेकिन समय सीमा निकल जाने के बाद भी कोई जानकारी पीड़ितों को नहीं दी जा रही है। जो भी जानकारी दी गई है वह भी आधी अधूरी दी जा रही है।

क्या है मामला


मध्यमवर्गीय आय कर्मचारियों को आवासीय प्लाट उपलब्ध कराने के लिए 2 सितम्बर 1973 में इस समिति का गठन किया गया था। इसमें सदस्यता शुल्क जमा करने के बाद प्लाट की कीमत देकर कर्मचारियों को प्लाट आबंटित किए जाने थे। लेकिन कुछ प्लाटों के आबंटन के बाद इसमें अनियमितताओं की शिकायतें आने लगीं। इस कारण से इस समिति को 15 अक्टूबर 2008 को भंग कर सहकारिता विस्तार अधिकारी को इसका प्रभारी नियुक्त कर दिया गया।

30 वर्षों से नहीं दी जा रही जानकारी


शिकायत कर्ता संजय दत्त दुबे निवासी गोपालगंज सागर ने बताया कि उनकी मां सेवानिवृत्त शिक्षिका हैं उन्होंने अपनी सदस्यता शुल्क और अंशधारी के रूप में 5 सौ रुपए जमा करने के बाद दो किश्तों में दस हजार रुपए 1976 में जमा किए थे। लेकिन आज तक प्लाट की स्थिति नहीं बताई गई। ऐसे ही राजेश दुबे और संजय पालीवाल निवासी खुरई भी अपने परिजनों के प्लाटों की जानकारी के लिए वर्षों से पूर्वाध्यक्षों एवं जिला कार्यालय के चक्कर काट रहे है। कई अंशधारी अपने प्लाटों की जानकारी मांगते मांगते इस दुनिया में नहीं रहे लेकिन आज तक अध्यक्ष से जानकारी नहीं मिली। स्व.मोतीलाल नेमा की विधवा भागवती बाई ने बताया कि उनके पति के बाद इस प्लाट का ही सहारा था वह भी मिलने की उम्मीद नहीं है। किराए के मकान में रहते -रहते जीवन निकल गया। राजेश दुबे ने बताया कि यहां दो -दो अध्यक्ष बने बैठे है किसी जानकारी का जबाब वर्तमान बीईओ कनिष्क चौबे देते है तो किसी जानकारी के जबाब देने के लिए उनके पिता शिवशंकर चौबे को प्रेसित किया जाता है।

चार वर्ष से प्रभार नहीं दे रहे पूर्वाध्यक्ष


सहकारिता विस्तार अधिकारी अनिल जैन ने बताया कि अनियमितताओं की शिकायतों के चलते इस समिति को 15 अक्टूबर 2008 को भंग कर दिया गया था। इस दौरान प्रभार में तीन सीईओ रह चुके है। इनके द्वारा कई बार पत्राचार करने के बाद भी पूर्व अध्यक्ष शिवशंकर चौबे अनाधिकृत रूप अध्यक्ष बने बैठे हैं उन्होंने आज तक समिति का प्रभार एवं दस्तावेज नहीं सौपे है,और न ही उन आदेशों के विरूद्ध सक्षम न्यायालय में अपील की है न ही संस्था द्वारा फिर कोई निर्वाचन कराया गया।

पुलिस बल से वसूला जाएगा रिकार्ड


सहकारिता विस्तार अधिकारी श्री जैन द्वारा बताया गया कि कई प्रयासों के बाद जब समिति का प्रभार और दस्तावेज नहीं सौंपे गए तो कब्जा लेने हेतु उच्च अधिकारियों ने मप्र सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 की धारा 57(2) और समिमि अधिनियम 1960 की धारा 57(क-1) के तहत कार्यपलिका मजिस्ट्रेट के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर पुलिस बल के सहयोग से रिकार्ड और प्रभार अधिग्रहण करेगा।
इनका कहना हैपिछले चार वर्ष से पूर्वाध्यक्ष अनाधिकृत रूप से पदमुद्रा एवं सील का दुरूपयोग कर रहे हैं। इस दौरान तीन सीईओ पदस्थ रहे जिन्होंने प्रभार एवं दस्तावेज लेने के लिए प्रयास किए। लेकिन प्रभार न मिलने पर मजबूरन मंत्रालय द्वारा मुझे दी गई शक्तियों का प्रयोग कर दस्ताबेज बलपूर्वक जब्त कराने के लिए कार्यवाही प्रारंभ कर दी है। इस हेतु 5 नवम्बर12 को संबंधित अधिकारियों सहित पुलिस को पत्र भेजे जा चुके है।
डॉ. एसडी पाण्डेय, उप पंजीयक सहकारी संस्थाएं, सागर

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