सागर। केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड द्वारा विगत पाँच वर्षों में कराये गए अध्ययन में यह तथ्य सामने आया है कि मानसून से पहले प्रतिवर्ष भू-जल स्तर में एक मीटर गिरावट हुई है। लोकसभा में यह जानकारी सांसद भूपेन्द्र सिंह के प्रश्न पर जल संसाधन मंत्री ने दी है।
लोकसभा में सांसद भूपेन्द्र सिंह ने प्रश्न कर जानना चाहा कि देश में भू-जल स्तर में गिरावट का ब्यौरा क्या है और उसके पुर्नभरण के लिए सरकार की योजनाएँ क्या हैं। जबाव में जल संसाधन मंत्री हरीश रावत ने बताया है कि केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड देश भर में स्थित 15653 प्रेक्षण कुओं के तंत्र के माध्यम से क्षेत्रीय मापन के आधार पर भूमि जल स्तरों की निगरानी करता है। जल स्तरों की वर्ष में चार वार जनवरी, अप्रैल/मई, अगस्त और नवम्बर के महीनों के दौरान निगरानी की जाती है।
गत पाँच वर्षों (2007 से 2012) के दौरान पूर्व मानसून अवधि (अप्रैल-मई) के भूमि जल स्तर के आंकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि विश्लेषित किए गए 55 प्रतिशत कुओं में जल स्तर घटने की प्रकृति पाई गई है। अधिकांश कुओं में एक मीटर प्रति वर्ष जल स्तर की गिरावट हुई है। जल संसाधन मंत्री ने बताया कि देश भर में भूमि जल के पुर्नभरण तथा भूमि जल स्तर को बढ़ावा देने के लिए केन्द्रीय भूमि जल बोर्ड ने प्रदर्शनात्मक कृत्रिम पुर्नभरण परियोजनाओं का कार्यान्वयन किया है।
सांसद श्री सिंह के एक अन्य प्रश् न पर पेयजल और स्वच्छता मंत्री भारत सिंह सोलंकी ने बताया कि भारत सरकार ने वर्षा जल सिंचित या शुष्क क्षेत्रों में स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था करने को उच्च प्राथमिकता दी है। इन क्षेत्रों सहित देश के ग्रामीण इलाकों में हेण्ड पम्प, पाइप के जरिए जल की आपूर्ति जैसी योजनाओं से पर्याप्त मात्रा में स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के लिए आवंटित निधियों का 67 प्रतिशत तक उपयोग किया जा सकता है।



कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें