शुक्रवार, 4 जनवरी 2013

गरीबों के इलाज के लिए आई दवाएं फेंकी कचरे में

जलाई गई जीवित दवाएं
 बीना। सरकारी अस्पताल में जनता के हक और सरकार की मंशा को आग के हवाले किया जा रहा है। हजारों रूपयों की कीमती दवाएं कचड़े में डली हुर्इं हैं।  इसके अलावा संक्रमित सुईयों एवं सीरिजों के साथ हुए रोगियों की खखार की जांच की डिब्बियां फेंकी जा रही हैं।  जिससे घातक बीमारियों के फैलने की आशंका बनी हुई है। गुरूवार को सूचना मिलते ही एसडीएम कर्मवीर शर्मा ने पहुंचकर प्रभारी समेत चिकित्सकों को जमकर फटकार लगाई।


उधर प्रसूतिकाओं के लिए जननी एक्सप्रेस के वाहन निलंबित सीएचएमओ द्वारा लेकर गायब होने की बात भी सामने आई है। अव्यवस्थाओं को लेकर चिकित्सकों में ही वाक युद्ध छिड़ गया। आई हास्पिटल के मुख्य द्वार के पास ही अधजला कचरा पड़ा था जिसमें बच्चों के पेट में होने वाले कृमि नाशक एलवेज जोल दवा की एक दर्जन शीशियां पड़ी थीं। इनकी अंतिम तिथि अक्टूबर 2013 अंकित थी। सुन्न करने वाली दवा लिगनोकीन की वायल पड़ी थी जिसकी अंतिम तिथि भी अक्टूबर 2013 थी। इनमें थोड़ी दूरी पर बी काम्पलेक्स के दो दर्जन से ज्यादा पैक वायल पड़े थे।
जली हुई दवाओं को देखते SDM कर्मवीर शर्मा

आग के कारण कागज जलने से उनकी तिथि समझ नहीं आ रही थी। इसके बाद मुख्य कचड़ा स्थल पर जली हुई अवस्था में इंजेक्शनों के सैकड़ों की संख्या में वायल पड़े थे। दर्जनों की संख्या में डायजीपाम के एम्पुल पड़े थे जिनकी अंतिम तिथि अगस्त 2012 अंकित थी। पास में ही बच्चों को उल्टी में दी जाने वाली डोमपीराडोन सायरप की शीशियां पड़ी थीं। कचरे के डिब्बे में हजारों की संख्या में गोलियों के पत्ते जले हुए पड़े थे। जो आयरन फोलिक एसिड के प्रतीत हो रहे थे। एसडीएम ने जब बिना एक्सपायरी दवा जलाने का जबाव डॉ.एमसी मेघवानी से मांगा तो उनका कहना था कि यह किसी मरीज ने फेंक दी होगी। जब उन्हें दर्जनभर शीशियां दिखाई तो वह चुप हो गए। एसडीएम ने तल्ख लहजे में सुधार के निर्देश दिए हैं।  


चारों तरफ फैला था कचरा 


अस्पताल की हालत देखकर एसडीएम कर्मवीर शर्मा का माथा ठनक गया। बीमारियों की जांच के लिए निकाला गया रक्त सिरिजों में खुली अवस्था में पड़ा था। मलेरिया जांच मे उपयोग की जाने वाली कांच की रक्त पट्टिकाएं की कचड़े में दर्जनों की संख्या में फेंकी गई हैं।  एसडीएम ने चारों तरफ फैले कचरे को देखकर उन्होनें सफाई व्यवस्था प्रभारी डॉ.एचके पालिया एवं डॉ.बलवीर कैथोरिया को भी आड़े हाथों लिया। इसके बाद सफाई अभियान शुरू हुआ।  अस्पताल में कचरे का निपटान वैज्ञानिक तरीके से होना चाहिए। लेकिन पूरा संक्रमित कचरा साधारण विधि से जलाया जाता है। कचरा निपटान स्थल पोषण पुर्नवास केन्द्र से लगा हुआ है। धुंआ जाने से वहां मरीजों का दम घुटने लगता है। इसके अलावा जहां सुई सीरिजों से एड्स एवं रक्त संचरण बीमारियों का खतरा है तो दूसरी तरफ क्षय रोग (टीबी) के फैलने का भी भय है। 


क्या डॉक्टर खुद हाथ में झाडू लेकर सफाई करेगा  


अव्यवस्थाओं एवं एसडीएम की डॉट ने चिकित्सकों की अंर्तकलह को उजागर कर दिया। डॉ.बलवीर कैथोरिया ने अस्पताल प्रभारी को निशाने पर ले लिया। उनका कहना था कि आप जिम्मेवारी नहीं निभाते और सुनना हमें पड़ता है। आप एक बार भी स्वीपरों को सफाई करने के निर्देश नहीं देते। हम बोलते हैं तो वे सुनते नहीं उनकी रूचि तो प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं से अवैध वसूली में रहती है। अब क्या डॉक्टर खुद हाथ में झाडू लेकर सफाई करेगा। डॉ.एचके पालिया ने भी प्रभारी को ही घेरा। दोनों चिकित्सकों को कारण बताओ नोटिस भी जारी   किए गए हैं।


जननी एक्सप्रसे भी मिली गायब 


सरकार महिलाओं की जान बचाने और उन्हें जरूरत के समय मदद मुहैया कराने के लिए जननी एक्सप्रेस वाहन चला रही है। लेकिन सरकारी कर्मचारी उनका निजी कामों में उपयोग कर रहे हैं। बीना अस्पताल के लिए स्वीकृत वाहन चार दिन से गायब हैं। नोडल अधिकारी डॉ.आरके जैन ने वाहन गायब होने की सूचना वरिष्ठ कार्यालयों को देते हुए थाने में एफआईआर कराने के लिए पत्र तैयार कर लिया है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक जिले के निलम्बित सीएचएमओ डॉ.सीएल गोस्वामी जननी एक्सप्रेस में 31 दिसंबर को बैठकर गए थे तभी से वाहन गायब है। डॉ.बलवीर कैथोरिया ने भी डॉ.मेघवानी के घुमावदार जबाव पर श्री गोस्वामी द्वारा वाहन ले जाने की बात उजागर करने की बात कही। इस पर डॉ.मेघवानी ने पहले तो कहा कि वाहन खराब हो गया है सुधरने गया है। बाद में बोल पड़े कि वाहन जा रहा था उसमें डॉ.गोस्वामी बैठ गए तो क्या मैं उन्हें उतार देता। 

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