
खुरई। किसान अपने अथक मेहनत कर अपने खेतों बखरनी के बाद खेत में अच्छा बीज बोता है और रासायनिक तथा जैविक दवाईयों का उपयोग कर अपनी पैदावार को बढ़ाने का प्रयास करता है। रासायनिक खादों के दुष्परिणाम को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों द्वारा जैविक खाद के उपयोग पर जोर दिया जा रहा है। इसी आशा में एक किसान ने अपने खेतों में जबलपुर से निर्मित एक कंपनी की जैविक खाद का उपयोग किया तो उसकी तीन एकड़ की फसल जल कर पूरी तरह सूखने लगी है।
महावीर वार्ड निवासी कल्लू ठाकुर ने बताया कि उन्होंने अपनी गेंहूं की फसल की पैदावार बढ़ाने के लिए जबलपुर की कंपनी नवकिसान वायो प्लांटिक लिमिटेड कंपनी की मोर 99 और विजेता नामक दो दवाईयां उसके ऐजेन्ट से कुछ दिन पहले खरीदी थी। ऐजेंट के बताए अनुसार दोनों को बराबर मात्रा में मिलाकर खेतों में फिकवा दिया उसके दो दिन बाद से ही फसल नीचे से पीली पीली होने लगी चौथे दिन तो पूरी तरह से पीली होने लगी ज्यो ज्यों पौधा बढ़ रहा है वह पूरी तरह से सूखता जा रहा है। कल्लू ने बताया कि उसने तीन एकड़ में इसका भुरकाव किया था जिससे उसका लगभग एक लाख से ज्यादा का नुकसान हुआ है। क्योंकि उसने अपने खेतो महंगा वाला बीज लखपति बोया था। इस संबंध में कृषि अधिकारियों को लिखित शिकायत की है।
इस संबध में बात करने के लिए ऐजेंट को कई फोन लगाने पर फोन रिसीव नहीं किया। जबलपुर कार्यालय में बात करने पर एक अधिकारी जीएस राजपूत ने बताया कि वे स्वयं आकर फसल की जांच करेंगे कि गलती कहां हुई।
इनका कहना है
इस संबंध में दवाईयों के बेग देखकर ही जानकारी मिल सकती है कि कौन सी दवाई किस काम की है। वैसे हमेशा ब्लाक से,स्थानीय दुकानों से या जानकार लोगों से ही कोई दवाई खरीदनी चाहिए। कभी कभी ऐंसा भी हो जाता है कि किसी चीज की दवाई किसी और काम के लिए थमा दी जाती है। पहले भी ऐसे कई मामले सामने आ चुके है।
एम एस नरवरिया,
कृषि विस्तार अधिकारी खुरई
इनका कहना है
दर असल अधिकतर बायो फर्टिलाइजर का व्यवसाय करने के लिए शासन ने बिना लायसेंस के व्यवसाय की छूट दे रखी है इस कारण से कई कंपनियां बिना प्रमाणित दवाईयां किसानों का सीधे बेच जाते है। जिसके दुष्परिणाम सामने आते है। किसानों को चाहिए कि अपनी जानी मानी दुकान या ब्लाक से ही दवाई खरीदें।
व्हीपी मिश्रा, एसडीओ कृषि विभाग, खुरई



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