रविवार, 24 फ़रवरी 2013

जिनालय औषधालय की तरह निदान करते है : माताजी

सागर। आर्यिका प्रभावनामति माताजी ने कहा के कि जनमानस को अपनी आत्मा का हित स्वयं देखना होगा।  सांस्कारिक मनुष्य को बताया कि जिनालय वे औषधालय हैं जहां मनुष्य को शारिरिक रोग के साथ मजबूरी में नहीं बल्कि सांसारिक कर्मरोगों से मुक्ति के लिए प्रतिदिन जाना चाहिए ऐसा करने पर फिर कभी शारिरिक रोग के औषधालय जाने की आवश्यकता नहीं होती ।

उन्होंने कहा कि पंच परमेष्टि अमंगल को मंगल में परिवर्तित करने के साध्य हैं यदि प्रत्येक व्यक्ति जिनालय जाकर जिन दर्शन की प्रतिज्ञा लेता है तो मिथ्यात्व रूपी रोग का स्वत: पलायन हो जाता है।

दिगम्बर जैन मंदिर मनोरमा कॉलोनी में प्रथम दिन तीन दिवसीय कलशारोहण कार्यक्रम आर्यिका प्रभावनामति जी के ससंघ सानिध्य में प्रारंभ हुआ ।  कार्यक्रम प्रात: जिन मंदिर में पूजा अर्चना के पश्चात आर्यिका संघ के प्रवचन और मंगलाचरण से आरंभ हुआ।  

दोपहर 1 बजे मंदिर के शिखर पर कलशारोहण के पूर्व शुद्धि आदि क्रियाओं को संपादित करने के लिए गोपालगंज दिगम्बर जैन मंदिर से 108 कलशों में शुद्ध जल लेकर घट यात्रा आरंभ की गई ।  दोपहर में मंदिर प्रागंण में जैन पंचायत सभा के कार्यकारी अध्यक्ष मुकेश जैन ढाना द्वारा मंगलाचरण के साथ मंत्रोत्चारण और विधि विधान से ध्वजारोहण कर कार्यक्रम का आरंभ किया गया।

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