खुरई। जहां केन्द्र सरकार पोस्ट आफिसों को आधुनिक और त्वरित काम के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर नए-नए उपकरण एवं आधुनिक तकनीक की मशीनें उपलब्ध कराई जा रही हैं, वहीं खुरई के मुख्य डाकघर में डाक व्यवस्था पूरी तरह चरमराई पड़ी है।
इतने बड़े शहर एवं जनसंख्या के लिए मात्र एक ही पोस्टमेन कार्यरत है, वह भी संविदा पर नियुक्त है और सागर से अप-डाऊन करता है। पोस्ट आफिस में कहने को तो तीन पोस्टमेन कार्यरत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल ही कार्यरत है। कई-कई दिनों तक नगर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में पत्रों वितरण नहीं किया जाता है।
खुद ही पत्र लेने जाना पड़ता है डाकघर
कई नागरिकों ने बताया कि उनके पत्र या पार्सल पोस्टमेन घर लेकर नहीं आता है, उन्हें स्वयं ही पोस्ट आफिस में जाकर अपने पत्र एवं पार्सल रिसीव करने पड़ते हैं। खानापूर्ति पोस्ट आफिस कर्मचारियों द्वारा पूरी की जाती है, इसके लिए पोस्टमेन पावती रसीद पर हस्ताक्षर कराने घर अवश्य आता है। इस कारण से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज एवं जानकारियां समय पर उपलब्ध न होने का खामियाजा नागरिकों को भुगतना पड़ता है। कई बार साक्षात्कार एवं नौकरियों संबंधी दस्तावेजों में इसी प्रकार विलंब होने के कारण अभ्यार्थियों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा।
धूल खा रही लाखों की मशीन
वर्ष 2008-09 में पोस्ट आफिस विभाग द्वारा अच्छे कार्य के लिए प्रधानमंत्री मनमोहनसिंह ने अप्रेल 2010 में सभी पोस्ट आफिसों को उनकी काया पलट एवं गुणवत्तापूर्ण कार्य करने के लिए प्रोजेक्ट ऐरो के तहत आधुनिकतम मशीन कियोस्क प्रदान की गई। प्रोजेक्ट ऐरो का मतलब तीर की तरह काम करना है, लेकिन यहां कार्य चींटी की गति से किया जा रहा है। कई पत्र डाक घर से नागरिकों को एक सप्ताह तक के बाद प्राप्त हो रहे हैं।
भ्रमित कर रहे पोस्ट आफिस कर्मचारी
डाक विभाग के लचर कार्य प्रणाली की पोल न खुल जाए इस कारण से अलग-अलग कर्मचारियों ने अलग-अलग जानकारी मीडिया को दी। जहां इस आधुनिक युग में मोबाइल, इंटरनेट, एटीएम, जैसे मशीनों का धड़ल्ले से उपयोग किया जा रहा है, वहीं पोस्ट आफिस के एक कर्मचारी ने बताया कि खुरई के नागरिक इसे चलाकर नहीं जानते इस वजह से चालू नहीं की गई है। वहीं अन्य कर्मचारियों ने अलग-अलग तर्क प्रस्तुत किए। जहां पोस्ट मास्टर का कहना है कि यह मशीन पूरी तरीके से स्थापित नहीं की गई है, वहीं दूसरे कर्मचारी ने बताया कि इसकी पूरी पेमेंट के बाद भी मशीन चालू नहीं की गई है।
6 माह से नहीं है पोस्टल आर्डर
इतने बड़े नगर में पोस्ट आफिस से कई प्रकार की सामग्री को खरीदने वाले बार-बार निराश लौटते हैं। पोस्ट आफिस में न तो पोस्टल आर्डर, टिकिट, लिफाफा सहित अन्य सामग्री की कमी हमेशा बनी रहती है। आरटीआई कार्यकर्ता विनय सप्रे ने बताया कि उन्हें अपने एक विशेष के लिए आरटीआई आवेदन लगाने के लिए पोस्टल आर्डर की सख्त आवश्यकता है, लेकिन पिछले 6 माहों से 10 रुपए वाले पोस्टल आर्डर के लिए भटक रहे हैं। लगभग दो माह पहले 50 रुपए के पोस्टल आर्डर आए थे, जो तुरंत ही खत्म हो गए। उसके कई बार डिमांड भेजे जाने के बाद भी पोस्टल आर्डर उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं।



कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें