सागर। वर्तमान भाजपा जिलाध्यक्ष जाहर सिंह को जिलाध्यक्ष का पद संभाले तीन माह बीत चुके हैं। लेकिन जिलाध्यक्ष ने अभी तक अपनी कार्यकारिणी की घोषणा नहीं की है। कार्यकारिणी की घोषणा न करने पर प्रदेशाध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर द्वारा पटकार भी लगाई गई है लेकिन उसका कोई असर दिखाई नहीं दे रहा है।
प्रदेशाध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने प्रदेश के उन जिलाध्यक्षों को 9 तारीख तक का अल्टीमेटम दिया था। जिन जिलाध्यक्षों ने अपनी कार्यकारिणी की घोषणा नहीं की थी। 9 फरवरी गुजर चुकी है लेकिन जाहर सिंह ने अपनी टीम की घोषणा नहीं की।
अब सवाल उठ रहा है कि जिस प्रकार भाजपा प्रदेशाध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने जिलाध्यक्षों को अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि यदि 9 फरवरी तक कार्यकारिणी की घोषणा नहीं करते हैं तो उन जिलाध्यक्षों के अधिकार छिन जाएंगे और प्रदेश द्वारा मनोनीत जिला प्रभारी उनसे पूछे बिना अपनी मर्जी से टीम बना आएंगे। तो क्या प्रदेश द्वारा मनोनीत जिला प्रभारी ही टीम बनाने आएंगे। गौरतलब है कि जनवरी माह के अंतिम सप्ताह में प्रदेश पदाधिकारी तथा जिलाध्यक्षों की बैठक आयोजित की गई थी।
जिसमें प्रदेश के जिला प्रभारियों को अपनी टीम बनाने के लिए निर्देशित किया गया था। प्रदेशाध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने जिलाध्यक्षों द्वारा टीम न बनाए जाने से नाराजगी जताई थी। उन्होंने सात दिन के भीतर जिला प्रभारियों को कार्यकारिणी बनाने की बात कही थी। इसके बाद यदि कार्यकारिणी नहीं बनी तो प्रदेश कार्य समिति बैठक के बाद संगठन द्वारा जिलों में बनाए गए प्रभारी वहां के नेताओं से विचार विमर्श कर कार्यकारिणी बना देंगे। जिससे जिलाध्यक्ष की पसंद और नपसंद का ख्याल नहीं रखा जाएगा।
अब सवाल उठ रहा है कि जिस प्रकार भाजपा प्रदेशाध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने जिलाध्यक्षों को अल्टीमेटम देते हुए कहा था कि यदि 9 फरवरी तक कार्यकारिणी की घोषणा नहीं करते हैं तो उन जिलाध्यक्षों के अधिकार छिन जाएंगे और प्रदेश द्वारा मनोनीत जिला प्रभारी उनसे पूछे बिना अपनी मर्जी से टीम बना आएंगे। तो क्या प्रदेश द्वारा मनोनीत जिला प्रभारी ही टीम बनाने आएंगे। गौरतलब है कि जनवरी माह के अंतिम सप्ताह में प्रदेश पदाधिकारी तथा जिलाध्यक्षों की बैठक आयोजित की गई थी।
जिसमें प्रदेश के जिला प्रभारियों को अपनी टीम बनाने के लिए निर्देशित किया गया था। प्रदेशाध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने जिलाध्यक्षों द्वारा टीम न बनाए जाने से नाराजगी जताई थी। उन्होंने सात दिन के भीतर जिला प्रभारियों को कार्यकारिणी बनाने की बात कही थी। इसके बाद यदि कार्यकारिणी नहीं बनी तो प्रदेश कार्य समिति बैठक के बाद संगठन द्वारा जिलों में बनाए गए प्रभारी वहां के नेताओं से विचार विमर्श कर कार्यकारिणी बना देंगे। जिससे जिलाध्यक्ष की पसंद और नपसंद का ख्याल नहीं रखा जाएगा।
कब बनेगी जिलाध्यक्ष की टीम
जाहर सिंह को सागर भाजपा जिलाध्यक्ष बने पूरे तीन माह गुजर चुके हैं, लेकिन उन्होंने अपने कार्यकाल के दौरान अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है। उनके जिलाध्यक्ष बनने से कई कार्यकर्ता नाखुश भी नजर आ रहे हैं। प्रदेशाध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर द्वारा दिए गए अल्टीमेटम के बाद भी कार्यकारिणी न बनाने से स्पष्ट हो रहा है कि उनकी गतिविधि क्षेत्र में किस तरह है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या भाजपा जिलाध्यक्ष को प्रदेशाध्यक्ष के निर्देशों की फिर्क नहीं है। भाजपा खेमे में कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों के बीच असमंजस नजर आ रहा है। देखना होगा कि अब जिला कार्यकारिणी की घोषणा कौन करता है।
कार्यकर्ताओं से मेलजोल नहीं
पार्टी सूत्रों के मुताबिक जब से जाहर सिंह जिलाध्यक्ष बने हैं तभी से भाजपा कार्यकर्ताओं का उनके साथ मेलजोल कम ही होता है। भाजपा के कार्यक्रमों में उनकी उपस्थिति भी देखने को कम मिलती है। भाजपा कार्यकर्ता खुलकर तो उनका विरोध नहीं कर रहे हैं लेकिन दबी जुवान में जिलाध्यक्ष की नाकामी की बात चर्चाओं का विषय बनी रहती है। वर्तमान जिलाध्यक्ष ने जब यह पद भार संभाला था तो कार्यकर्ताओं को उम्मीद थी कि भाजपा की टीम में एक नया जोश आएगा, कार्यकर्ता एकजुट होकर काम करेंगे लेकिन ऐसा होता दिखाई नहीं दे रहा है। भाजपा के कार्यकर्ताओं और नेताओं के बीच चल रहे मनमुटाव से विधानसभा चुनाव 2013 का मिशन खतरे में दिख रहा है।
इसी कड़ी में युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष गौरव सिरोठिया का नाम भी जोड़कर देखा जा रहा है। युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष भी कार्यकर्ताओं से तालमेल नहीं बना पा रहे हैं। कार्यक्रमों में उनकी उपस्थिति एवं कार्यकर्ताओं से मेलजोल कम होता है। वे अपने कार्यकाल में कोई बड़ा कार्यक्रम भी आयोजित नहीं कर पाए हैं। पार्टी सूत्रों की माने तो वर्तमान भाजयुमो जिलाध्यक्ष गौरव सिरोठिया संगठन बनाने में विफल साबित हुए हैं। यदि इनको दोबारा भाजयुमो जिलाध्यक्ष बनाया जाता है तो भाजपा को इसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है।




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