शुक्रवार, 7 दिसंबर 2012

फर्जी निकला प्रोफेसर राजश्री का जाति प्रमाण पत्र, हो सकती है FIR

सागर। पिछले सात साल से फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर नौकरी कर रही शासकीय कालेज खुरई की प्रोफेसर पर अब गाज गिर सकती है। कलेक्टर ने इस संबंध में कालेज प्राचार्य को पत्र जारी कर जबाव मांगा है। जबाव मिलने के बाद शिक्षिका पर पुलिस धोखाधड़ी का मामला दर्ज कर सकती है।

मिली जानकारी के अनुसार शासकीय कालेज खुरई के रसायन शास्त्र विभाग में प्रो. राजश्री रैकवार फर्जी जाति प्रमाण पत्र के आधार पर वर्ष 2005 से कार्य कर रही हैं। वर्ष 2007 में झांसी के एक युवक ने सचिव उच्च शिक्षा विभाग से आरटीआई के तहत इनके जाति प्रमाण पत्र के  संबंध में जानकारी मांगी और जानकारी मिलने के बाद कलेक्टर के यहां फर्जी जाति प्रमाण पत्र संबंधित प्रकरण दर्ज कराया। 

इसी दौरान पुलिस अधीक्षक ने फर्जी जाति प्रमाण पत्र की वैद्यता कलेक्टर जबलपुर से कराई। कलेक्टर, एसडीएम एवं तहसीलदार जबलपुर ने इस आशय का पत्र भेजा कि जबलपुर जिले के किसी भी न्यायालय से प्रो. राय का जाति प्रमाण पत्र नहंी बना। यह प्रमाण पत्र फर्जी है। इस आधार पर प्रो. राय एससीएसटी जाति के विशेष भर्ती अभियान के नौकरी पाने की पात्र नहीं है।

उक्त पत्र को आधार मानते हुए सागर कलेक्टर ने 18 जुलाई 2011 को उन्हें नोटिस जारी कर पूछा कि क्यों न इस मामले को लेकर धारा 420 के तहत कार्रवाई की जाए। इस नोटिस के विरूद्ध प्रो. राय हाई कोर्ट से स्थगन ले आर्इं। 27 जून 2012 को हाई कोर्ट ने इस आधार पर स्थगन समाप्त कर दिया कि मप्र शासन के उच्चाधिकारी और छानबीन समिति इस प्रकरण को देख रही है। इस कारण हाई कोर्ट इसमें दखल नहीं दे सकता। स्थगन समाप्त होन के बाद कलेक्टर सागर ने 20 नवंबर 2012 को एक पत्र के माध्यम से शासकीय कालेज खुरई प्राचार्य को निर्देशित एवं अधिकृत किया है कि वे प्रो. राय के विरूद्ध नियमानुसार कार्रवाई कर जिला प्रशासन को समय सीमा में अवगत कराएं। 

गौरतलब है कि तात्कालीन प्राचार्य ने भी प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए शासन से इसकी शिकायत की थी। जिस कारण प्राचार्य के ऊपर प्रो. राय ने आपराधिक प्रकरण दर्ज करा दिया कि प्राचार्य हमें प्रताडि़त कर रहे हैं। 
इनका कहना है

कलेक्टर का पत्र मिलने के बाद प्रो. राजश्री रायकवार से कलेक्टर के द्वारा भेजे गए पत्र के आधार पर जबाव मांगा गया है। उन्हें 5 दिसंबर को नोटिस दिया गया है। 10 दिन का समय दिया गया है। जबाव मिलने के बाद कार्रवाई होगी। 

डॉ. बीके चितले, 
प्राचार्य शासकीय कालेज, खुरई

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