शुक्रवार, 15 फ़रवरी 2013

बीना मंडी अध्यक्ष एवं सदस्य के विरूद्ध चुनाव याचिकाएं विचारार्थ स्वीकार्य

बीना कृषि मंडी चुनाव पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय रहे हैं जहां चुनाव में जमकर मंडी सदस्यों की करोड़ों रुपए की खरीद फरोख्त चर्चा में रही वहीं चुनाव के बाद जमकर हुआ दो पक्षों का विवाद और संघर्ष भी मीडिया और अखबारों में चर्चा का विषय बना रहा। बीना कृषि मंडी अध्यक्ष श्रीमति प्रीति नायक की मुश्किलें दिन ब दिन बढ़ती जा रही हैं। श्रीमति नायक एवं एक मंडी सदस्य लोकेन्द्रसिंह के विरूद्ध कमिश्रर कोर्ट में दायर याचिकाएं विचारार्थ स्वीकार्य कर ली गई हैं।

बीना।  कृषि उपज मंडी समिति की नवनिर्वाचित अध्यक्ष श्रीमती प्रीति नायक के वार्ड क्रमांक 10 से मंडी सदस्य के निर्वाचन के विरूद्ध प्रस्तुत याचिकाएं न्यायालय श्रीमान कमिश्नर सागर द्वारा स्वीकार कर ली गई हैं। इस प्रकरण में कमिश्नर न्यायालय द्वारा आगामी पेशी दिनांक 5 मार्च को है। यह निर्वाचन याचिका आत्माराम लिटोरिया एवं श्रीमति ज्योति पीपी नायक द्वारा प्रस्तुत की गईं थीं।


सुनील सीरोठिया ने भी लगाई याचिका


अध्यक्षीय चुनाव निर्वाचित अध्यक्ष प्रीति नायक जो कि अध्यक्षीय निर्वाचन में मत टाई होने के कारण पर्ची सिस्टम द्वारा उनकी नियुक्ति की गई थी। इस अध्यक्ष के चुनाव में सुनील सीरोठिया और श्रीमती नायक को समान मत प्राप्त हुए थे। सीरोठिया द्वारा एक निर्वाचन याचिका प्रस्तुत की गई है जिसमें उन्होंनें प्रीति नायक पर यह आरोप लगाया है कि चूंकि प्रीति नायक कृषक सदस्य के रूप में निर्वाचित होने के लिए पात्र नहीं थी इस कारण वह अध्यक्ष का चुनाव नहीं लड़ सकती थीं। याचिका में अध्यक्षीय निर्वाचन शून्य घोषित करने की मांग की गई है।


मंडी सदस्य लोकेन्द्रसिंह के विरूद्ध भी याचिका दायर


जहां मंडी अध्यक्ष प्रीति नायक के विरूद्ध कमिश्नर कोर्ट में लगाई गई याचिकाएं स्वीकार कर ली गर्इं वहीं वार्ड क्रमांक 6 किर्रोद से पराजित प्रत्याशी हरिनारायण कुशवाहा द्वारा भी निर्वाचित प्रत्याशी लोकेन्द्रसिंह पिता भगवानसिंह ठाकुर देहरी व अन्य के विरूद्ध निर्वाचन याचिका प्रस्तुत की है। हरिनारायण कुशवाहा ने रिटर्निंग अधिकारी बीना को पक्षकार बनाते हुए उन पर दोषारोपण किए हैं। इस निर्वाचन में कुशवाहा ने लोकेन्द्रसिंह पर आरोप लगाए हैं कि वह कृषक सदस्य पद हेतु अपात्र होने के बावजूद उन्हें विजयी घोषित किया गया। जबकि लोकेन्द्रसिंह के नाम से ग्राम देहरी में गिट्टी पत्थर की खदान स्वीकृत है एवं लोकेन्द्रसिंह मौनी बाबा कंस्ट्रक्शन कंपनी नामक फर्म के संचालक एवं भागीदार हैं।

इनका कहना है
मंडी अधिनियम के अनुसार दायर याचिकाओं का 6 माह में निराकरण किए जाने का प्रावधान है और संभवत: 6 माह के भीतर इन याचिकाओं का फैसला हो जाएगा।
राजकमल सोनी, अधिवक्ता, बीना

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