सागर। पैसे से सब कुछ नहीं खरीदा जा सकता है। आप धन से मकान बना सकते हैं, एसी लगवा सकते हैं अन्य विलासिता की वस्तुएं प्राप्त की जा सकती हैं। लेकिन अगर नींद न आए तो किस काम का वैभव है? यह बात मुनि श्री अजित सागर महाराज ने रामपुरा वार्ड में चल रहे 1008 सिद्धचक्र महामंडल विश्वशांति महायज्ञ के दूसरे दिन धर्म सभा में कही।
मुनि श्री ने कहा कि जिनके जीवन में परमात्मा के प्रति आस्था भक्ति हो तो उसके जीवन में अपूर्व आनंद की प्राप्ति होती है। उसे अपने आप सब मिल जाता है। सिद्धचक्र विधान में उन महान आत्माओं का वर्णन है जो आस्था की आंखो से ही दिखाई देगा। ऐंसे साधन जुटाओ जिससे शांति मिल सके और ऐंसे साधन न जुटाओ जिनसे अशांति हो। मुनि श्री ने कहा कि घर के बाहर के दर्शन से ही व्यक्ति का पता चल जाता है कि वह संस्कारवान है या नहीं।
घर में कमरे बहुत रहते हैं लेकिन स्वाध्याय का कमरा है या नहीं? घर कितना बड़ा हो, परंतु आत्मा की शांति हेतु स्वाध्याय के कमरे हेतु स्थान अवश्य होना चाहिए। जीवन का यथार्य है कि जो अपना है उसे आपने अपना कभी माना ही नहीं। सिद्धों की आराधना अपने आप को पहचानने का साधन है। सभी जीव अपना जीवन जीते हैं। परंतु जीने का तरीका अलग अलग होता है। एक जीव के लिए जीता है और दूसरा जीभ के लिए। जहां मांग चलती रहे वहां अंत नहीं होता है। सिद्धत्व के लिए पूरा जीवन समर्पित करना पड़ता है।



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