सागर। न्यायिक व्यवस्था में फोरेंसिक विज्ञान की भूमिका पर आधारित तीन दिवसीय विशिष्ट प्रशिक्षण कार्यक्रम का रविवार को समापन किया गया। प्रथम सत्र में केसी शर्मा वैज्ञानिक राज श्रीवास्तव ने चेहरों के मिलान व डिजीटल फोरेंसिक पर व्याख्यान दिए।
जिसमें चेहरों की पहचान, परीक्षण, वैज्ञानिक पद्वति से फोटो में दिख रहे चेहरों से छेड़छाड़, धोखाधड़ी के मामले, रजिस्ट्री, फोटोयुक्त दस्तावेजों से संबंधित विस्तृत जानकारी वैज्ञानिकों ने दी। मेडीकल कालेज के विवाद छात्रों के प्रकरण जिसमें प्रवेश लेने वाले छात्रों की वैज्ञानिक जांच प्रयोगशाला में कैसे कराई जा सकती है। चेहरों पर स्थित विकृतियों को एक पैरामीटर के माध्यम परीक्षण कैसे किया जा सकता है। वहीं वैज्ञानिक श्रीवास्तव ने उपस्थित प्रतिभागियों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए।
कार्यक्रम में डीजीटल फोरेंसिक पर चर्चा की गई। कंप्यूटर मेमोरी, पेनड्रायव, सीडी, मोबाइल फोन आदि के परीक्षण पर चर्चा की गई। चित्र में चेहरों को बदल दिया जाना पर विचार किया गया। कार्यक्रम के अंत में समूह चर्चा रखी गई। इसमें डॉ. एमके वर्मा, भरत भूषण, एसएस रघुवंशी, जेके अग्रवाल, एसके तिवारी ने सामूहिक चर्चा की और एफएसएल तथा न्ययालयों के बीच संबंध तथा सूचना के आदन प्रदान पर खुलकर विचार रखे गए। कार्यक्रम के समापन पर वैज्ञानिकों ने बताया कि आयोजित तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से उपलब्ध कराई गई जानकारी के कारण न्यायाधिशों को उसका लाभ मिलेगा।
समापन समारोह में प्रतिभागियों को स्मृति चिन्ह एवं प्रसंशा पत्र वितरित किए गए। संचालन डॉ. ज्योत्सना पांडे ने किया आभार एसके तिवारी ने माना।



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