बीना। प्रशासनिक तंत्र की लापरवाही ने स्वास्थ्य योजनाओं का दम निकाल कर रख दिया है। ताजा मामला बीना की सरकारी अस्पताल में देखने को मिला है जहां पर संवेदनहीनत की सारी हदें पार करते हुए महिला कर्मचारियों ने प्रसव कराने आई दो महिलाओं को उस समय पीटा जब वह बच्चा जन्मते समय दर्द से कराह रही थीं। अभद्रता एवं अशोभनीय आचरण का भी उन्हें सामना करना पड़ा।
इसके अलावा एक ही रात में आधा दर्जन प्रसूतिकाओं से अवैध वसूली करने का भी खुलासा हुआ है। प्रबंधन ने चार कर्मचारियों को अस्पताल से हटाते हुए कार्रवाई की अनुशंसा की है। जानकारी के मुताबिक खिमलासा निवासी दीपक अहिरवार ने अपनी पत्नि भागवती को गुरूवार रात 9 बजे सरकारी अस्पताल में प्रसव के लिए भर्ती कराया। जहां प्रसव के दौरान जोर न लगाने पर महिला कर्मचारियों ने उसकी पिटाई शुरू कर दी। वह चिल्लाती रही लेकिन पत्थर दिल कर्मचारियों का दिल नहीं पसीजा।
इसी तरह भानगढ़ निवासी भगवत चढ़ार की पत्नि राजकुमारी को गुरूवार की रात 12 बजे एम्बूलेंस की सहायता से भर्ती कराया गया। जहां जांच के लिए नर्स तक नहीं मिली। आया एवं स्वीपर महिला कर्मचारियों ने बच्चा जन्मते समय दर्द न लेने पर उसकी चांटों से पिटाई की उसके माँ बनने पर भी गंदी टिप्पणीयां की। प्रसव होते ही तीन सौ रुपए वसूल कर उसे पलंग से हटा दिया चाय का भी इंतजाम करवाया गया। गरीब महिला से दवाईयां भी बाहर से बुलाई गर्इं।
अस्पताल में प्रसव के दौरान महिलाओं की न सिर्फ पिटाई की बल्कि अस्पताल में कदम रखना भी उन्हें महंगा पड़ जाता है। बीना निवासी नजीर खान ने बताया कि उनकी पत्नी रात में प्रसव के लिए तड़पती रही, हम लोग नर्सों को बुलाने खड़े रहे। उसे अकेले ही पलंग पर बच्चे की असुरक्षित तरीके से जन्म देना पड़ा। गनीमत रही कि बच्चा पलंग से नीचे नहीं गिरा। प्रसव होने के बाद महिला कर्मचारियों ने दो सौ रुपए लिए। इसी तरह देहरी गांव से आई रामसखी पति मानसिंह अहिरवार से चार जोड़ी दस्ताने और ड़ेढ़ सौ रुपए वसूले।
पुरैना गांव से आई दीपा पति मोहरसिंह ठाकुर एवं रूसल्ला निवासी मोहती पति सुरेश मल्होत्रा से भी सुविधा राशि वसूल की एवं मुफ्त मिलने वाली सरकारी दवाईयों के दाम वसूले एवं चाय पानी की व्यवस्था कराई। सुबह शिकायतें मिलते ही प्रबंधन ने पंचनामा कार्रवाई कर कर्मचारियों की शिनाख्त करवाई एवं उनके आचरण को कदाचरण की श्रेणी में पाते हुए अस्पताल से रिलीव कर अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए सीएचएमओ कार्यालय भेज दिया है। वसूली का काम अस्पताल में लंबे समय से चल रहा है दर्जनों मामले फायलों में बंद पड़े हैं प्रसूतिकाओं की मौत के मामले भी पर्दे में ही हैं।



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