बीना। शासकीय एवं अशासकीय संस्थाओं में सामूहिक सूर्य नमस्कार का कार्यक्रम शुरू हुए 5 वर्ष बीत चुके हैैं। लेकिन अभी भी स्कूली छात्र सूर्य नमस्कार की क्रियाओं से पूरी तरह से अंजान हैं। शासकीय संस्थाओं में सरकारी फरमान मिलते ही सूर्य नमस्कार की कवायदें शुरू कर दी जाती हैं और निर्धारित तिथि गुजरते ही स्थिति ज्यों की त्यों हो जाती है। एक बार फिर 12 जनवरी को होने वाले सामूहिक सूर्य नमस्कार की कवायदें शासकीय फरमान जारी होते ही शुरू हो गई हैं।
वर्ष 2007 में प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने योग गुरू बाबा रामदेव से प्रभावित होकर प्रदेश स्तर पर 12 जनवरी को विवेकानंद जयंती के उपलक्ष्य में सामूहिक सूर्य नमस्कार कार्यक्रम शुरू किया गया था। सभी विभागों के अधिकारी कर्मचारी के अलावा सभी शैक्षणिक संस्थाओं के छात्र-छात्राओं ने इस कार्यक्रम में बड़े जोर-शोर के साथ भाग लिया था। शासकीय शालाओं में हफ्ते में तीन दिन सूर्य नमस्कार कराना टाईम-टेबिल में शामिल किया गया था।
लेकिन सामूहिक सूर्य नमस्कार के कुछ दिनों बाद ही इसे भुला दिया गया। आज हालत यह हैं कि भले ही इस कार्यक्रम को शुरू हुए 5 वर्ष बीत चुके हैं, मगर स्कूली छात्र सूर्य नमस्कार से पूरी तरह अंजान है। कक्षा आठवीं की छात्रा रिंकी राजपूत ने बताया कि पिछले वर्ष जनवरी माह में कुछ दिन शिक्षक द्वारा सूर्य नमस्कार कराना सिखाया गया था। कुछ दिन बीत जाने के बाद शिक्षकों ने सिखाना बंद कर दिया।
अब जब हम सूर्य नमस्कार करना भूल चुके हैैं तब एक बार फिर सूर्य नमस्कार सिखाने की चचार्एं शुरू हो गई हैं। इसी तरह बेलई, बिहरना, कनखर, कोंरजा, सतोरिया, मेवली, बारधा, किर्रोद, सबदा, पाली, गुलौआ, नौगांव एवं भानगढ़ के शासकीय माध्यमिक स्कूलों के छात्रों को सूर्य नमस्कार की जानकारी नहीं है। ज्ञातव्य है कि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने योग शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए शासकीय शालाओं में सूर्य नमस्कार अनिवार्य रूप से कराने का निर्देश दिया गया था। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा शहरी क्षेत्र के शासकीय स्कूलों में शासन द्वारा निर्धारित सामुहिक सूर्य नमस्कार वाली तिथि एक दो दिन पहले ही सूर्य नमस्कार करना योग शिक्षकों द्वारा सिखाना शुरू किया जाता है। बाकी दिनों में स्थिति ज्यों की त्यों हो जाती है। वर्तमान में सूर्य नमस्कार सिखाने वाले शिक्षक ही इसकी क्रियाएं भूल चुके हैं। योग में विशेष रूचि रखने वाले पं. बृजेश शर्मा ने बताया कि बच्चों को सुबह के समय सूर्य नमस्कार की क्रियाएं कराने से उनका मस्तिष्क तरो ताजा हो जाता है और इससे उनकी याददाश्त मजबूत होती है। जो विद्यार्थियों के लिए फायदेमंद है। इसके अलावा सूर्य नमस्कार की क्रियाएं करने से मुनष्य निरोगी बना रहता है।
प्राथमिक स्तर के बच्चों की अनिवार्यता खत्म
वर्ष 2007 में सभी स्तर की कक्षाओं के विद्यार्थियों को सूर्य नमस्कार कार्यक्रम में शामिल होना अनिवार्य किया गया था। वर्ष 2008 में ठंड के कारण र्प्राथमिक शालाओं के बच्चों को सूर्य नमस्कार कार्यक्रम में शामिल होना ऐच्छिक कर दिया गया था।
28 हजार विद्यार्थी होंगे शामिल
ब्लॉक शिक्षाधिकारी एसएन रावत ने बताया कि ब्लॉक में 66 माध्यमिक, 18 हाईस्कूल एवं 6 हाई सेकेण्ड्री स्कूल के करीब 28 हजार छात्र-छात्राएं सूर्य नमस्कार कार्यक्रम में शामिल होंगे। ग्रामीण क्षेत्रों में यह कार्यक्रम शाला स्तर पर किया जाएगा। सामूहिक सूर्य नमस्कार का कार्यक्रम शहर के उत्कृष्ट विद्यालय क्र. 1 में किया जाता है। सामूहिक सूर्य नमस्कार कार्यक्रम कराने के संबंध में अभी तक कोई दिशा निर्देश प्राप्त नहीं हुए हैं।



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