शुक्रवार, 15 फ़रवरी 2013

दूसरे दिन भी सूना रहा ममत्व मेला, इंतजाम में भी दिखी खामियां

सागर। खेल परिसर के बाजू वाले मैदान में आयोजित हो रहे प्रदेश स्तरीय ममत्व मेले का आगाज फीका ही रहा। मेला दूसरे दिन भी लोगों की भीड़ का इंतजार करता रहा। ऊपर से आयोजकों द्वारा व्यवस्थाओं की कमी के चलते इस आयोजन में रंग में भंग डालने का कार्य किया। शुक्रवार को दूसरे दिन मैदान में लगी दुकानें बीरान पड़ी रहीं।

कार्यक्रम स्थल पर इक्का-दुक्का लोग ही नजर आ रहे थे। मेले की नाकामयाबी से आयोजकों के माथे पर चिंता की लकीरें थी। शुक्रवार की शाम हलकी बुंदाबांदी ने दुकानदारों की चिंता बढ़ा दी। जिला प्रशासन की तरफ से बारिश से बचने के कोई इंतजाम नहीं किए गए। कई दुकानदार व्यवस्थाओं से नाखुश नजर आए। शाम को महिला वित्त विकास निगम अध्यक्ष श्रीमती सुधा जैन, कलेक्टर योगेन्द्र शर्मा, जिला शिक्षा अधिकारी आरएन शुक्ला, सहायक अधिकारी धीरेन्द्र मिश्रा, सिटी मजिस्टेÑट अचर्ना सोलंकी ने मेले का जायजा लिया।


मेडम पानी से बचने की व्यवस्था नहीं


शाम करीब 4 बजे कार्यक्रम की आयोजक महिला वित्त विकास निगम अध्यक्ष सुधा जैन जब अपनी सफेद सफारी गाड़ी से कार्यक्रम स्थल पर पहुंची तब मामूली बूंदाबांदी हो रही थी। श्रीमती जैन ने मेले में लगी दुकानों का निरीक्षण किया। तो विदिशा की करमाती महिला स्व सहायता समूह की स्टाल पर दुकानदार ने कहा कि मेडम कार्यक्रम स्थल पर पानी से बचने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। इसका इंतजाम हो सकता है क्या। तो श्रीमती जैन ने कहा कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि मौसम बदल जाएगा।


सामान बटोरते नजर आए दुकानदार


शाम को जब जिला प्रशासन के आला अधिकारी मेले का निरीक्षण कर रहे थे तभी मामूली बूंदाबांदी भी हो रही थी। कार्यक्रम स्थल पर लगी स्टालों के दुकानदार अपना-अपना सामान बटोरते नजर आ रहे थे। इस बात को लेकर अधिकारी भी चिंतित थे। मां दुर्गा स्व सहायता समूह के संचालक ने अपनी आंवला मुरब्बा की दुकान लगाई हुई थी। दुकानदार ने बताया कि यदि पानी गिर जाता है तो वे कहां जाएंगे।  अरिहंत कला केन्द्र सागर की कपड़ा एवं गिफ्ट आईटम के दुकान मालिक ने बताया कि उन्हें मौसम की बड़ी चिंता हो रही है। पानी गिरता है तो वे भागकर कहां जाएंगे।


नहीं आए स्वसहायता समूह


कार्यक्रम में प्रदेश के होशंगाबाद, बेतूल, रतलाम सहित अन्य क्षेत्रों से स्व सहायता समूह की स्टाल लगी हैं। लेकिन कुछ दुकानदार मेले में नहीं आए हैं। यह बात खुद कार्यक्रम की आयोजक श्रीमती जैन भी मानती हैं। जानकारी के अनुसार कार्यक्रम में 100 स्व सहायता समूह भाग लेने वाले थे। लेकिन इसमें से 20 दुकानदार शामिल नहीं हुए हैं। निरीक्षण करने पहुंचे कलेक्टर ने कहा कि कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए दूसरे विकल्प भी हैं। कार्यक्रम का समय भी बढ़ाया जा सकता है।

कलेक्टर योगेन्द्र शर्मा ने मौजूद जिला शिक्षा अधिकारी आरएन शुक्ला से कहा कि कार्यक्रम के बारे में क्या आपने स्कूली बच्चों को इसकी जानकारी नहीं दी है। तो जिला शिक्षा अधिकारी कलेक्टर के सामने कुछ भी बोलने से कतराते नजर आए।


मौसम ने छीनी भीड़


मौसम खराब है यह उम्मीद नहीं थी कि मेले के आयोजन के समय मौसम करवट बदलेगा और बूंदाबांदी हो जाएगी। यह आयोजन महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए किया गया था। सागर महोत्सव में सांस्कृतिक कार्यक्रम के चलते भीड़ की उम्मीद थी लेकिन मौसम ने भीड़ छीन ली। बारिश से बचने के इंतजाम की कमी है। बारिश से बचने के लिए दुकानदारों ने अपनी व्यवस्थाएं की हैं। बूंदाबांदी से नुकसान का कोई खतरा नहीं है।

श्रीमती सुधा जैन, महिला वित्त विकास निगम अध्यक्ष सागर



प्रशासन सिर्फ मंच प्रदान कर सकता है



प्रत्येक कार्यक्रम की जिम्मेदारी प्रशासन की नहीं होती। लोगों को भी इसमें सहयोग करना चाहिए। यह कार्यक्रम ग्रामीण महिलाओं को स्वालंबी बनाने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। शहर के लोगों को सहयोग करना होगा। प्रशासन महिला शक्तिकरण के लिए एक मंच प्रदान कर रहा है। इस आयोजन में बड़े मेले की तरह चकाचौंध नहीं है लेकिन इसमें महिलाओं की मेहनत दिख रही है। जनता को सहायता करनी होगी।

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