बुधवार, 6 फ़रवरी 2013

हमारी धरोहर हैं शास्त्रीय कलाएं : प्रेरणा

सागर।  पिछले दस वर्षों से शहर के बीड़ी उद्योगपति स्व. बाबूराव पिम्पलापुरे की स्मृति में व्याख्यानमाला आयोजित की जाती है। जिसमें अनुपस्थिति की उपस्थिति श्रृंखला के माध्यम से अनेक जानी-मानी हस्तियों के द्वारा व्याख्यान प्रस्तुत कराए जाते है।

इस बार कत्थक नृत्य की सुश्री प्रेरणा श्रीमाली ने कथक का अकथ विषय पर व्याख्यान दिया। जिसमें उन्होंने सहज रूप से कथक नृत्य की विस्तृत विवेचना प्रस्तुत की। 

भक्ति का चरम नृत्य है। वर्तमान में दक्षिण भारत में संस्कारों की परंपरा का निर्वाह हो रहा है। लेकिन उत्तर भारत में संस्कारों के निर्वाहन में चूक हो रही है। नृत्य जीवन को नई दृष्टि से देखने का अवसर देता है। साथ ही स्वयं को समझने का मौका भी देने में नृत्य सक्षम है। ये विचार कत्थक नृत्यांगना सुश्री प्रेरणा श्रीमाली ने व्यक्त किए। वे रवीद्र  भवन में स्व. बाबूराव पिम्पलापुरे स्मृति व्याख्यान माला को संबोधित कर रहीं थीं। उन्होंने कहा कि शास्त्रीय कलाएं हमारी धरोहर हैं।


कार्यक्रम अध्यक्ष कलेक्टर योगेन्द्र शर्मा ने कहा कि स्व. बाबूराव पिम्पलापुरे की स्मृति में किया जाने वाला यह आयोजन उनके व्यक्तित्व, कृतित्व को सतत रूप से बनाए रखने का प्रयास है। इस अवसर पर स्व. पिम्पलापुरे की पुत्री नीता खन्ना ने बीआर फांउडेशन बनाने की घोषणा की।  श्रीमती आशा पिम्पलापुरे, शांभ्वी शुक्ला ने मुख्य वक्ता सुश्री श्रीमाली, चंद्रशेखर पिम्पलापुरे ने कलेक्टर का स्वागत किया। कार्यक्रम में डॉ. जीवनलाल जैन, हरगोविंद विश्व, प्रो. एसपी व्यास, डॉ. आशुतोष गोस्वामी की जिज्ञासाओं का समाधन सुश्री श्रीमाली ने किया कार्यक्रम के अंत में समिति अध्यक्ष डॉ. मीना पिम्पलापुरे ने आभार व्यक्त किया। साथ ही दो मिनिट का मौन रखकर सभी ने श्रद्धांजलि अर्पित की। 

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