राहतगढ़। शासन द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति के लिए करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाए जा रहे हैं तथा अनेक गांवों में बुन्देलखण्ड पैकेज के तहत पीएचई के माध्यम से नल जल योजनाऐं प्रारंभ कराई जा रही हैं वहीं ब्लॉक के अनेक गांवों में अभी से पेयजल संकट गहराने लगा है तथा शासन द्वारा करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी ग्रामीणजनों को जलसंकट से निजात नहीं मिल पा रही है।
ग्रामवासियों का कहना है कि गांवों में लगे सरकारी हेण्डपंप पीएचई के मैकेनिकों द्वारा बार-बार सुधारने के बाद भी बिगड़ जाते हैं और उन हैंडपंपों का पानी लगातार निचली सतह पर पहुंचता जा रहा है। जिस कारण हैंडपंप भी सूखी हवा ही निकाल रहे हैं साथ ही अन्य जलस्त्रोत भी सूखते जा रहे हैं। इसके अलावा ग्राम कठोंदा, रूसल्ला, रजवांस, काटीघाटी, सोठिया, टीला बुजुर्ग, मसानिया, पीपरा, जलंधर, झिला, मीरखेड़ी, ऐरन, गढ़ाघाट, चन्द्रापुर, परासरी कलॉ, चैकी, बेरखेड़ी, बहादुरपुर, ओसानखेड़ी, सहित क्षेत्र के अनेक गांवों में जलसंकट गहराता जा रहा है और ग्रामवासी पेयजल के लिए परेशान हो रहे हैं।




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