रविवार, 3 फ़रवरी 2013

बढ़ गया जल संकट: नगरपालिका ने पहले से नहीं किये इंतजाम

खुरई।  आखिरकार वही हुआ जिसका डर था नगरपालिका पहले से नहीं चेता और गर्मियां आने के पहले ही नगर में जल संकट गहरा गया। सभी वार्डों में जगह जगह महिलाएं,पुरूष और बच्चे कुप्पे लिए और नलों पर लंबी लंबी कतारों में देखे जाने लगे हैं।

लोगो को चिंता सताने लगी है कि तेज गर्मियों में क्या होगा। नगर के कई बुद्धि जीवियों ने और मीडिया कर्मियों ने सभी बोरबेलों में रूफवाटर हार्वेस्टिंग कराने की सलाह दी थी लेकिन सलाह न मानने के कारण सर्दियों में ही जल संकट गहरा गया।

नगर में दो दो टंकियां,125 हाथ से चलाने वाले हेंडपंप और 96 मोटर वाले बोर होते हुए भी नगर में अभी से जल संकट की स्थिति निर्मित हो गई हैं। ऐसा अनुमान है कि गर्मियों में यह संकट जानलेवा भी साबित होगा। नगर पालिका ने इस मामले में दूरदर्शिता नहीं दिखाई जिसके चलते यह समस्या पैदा हो रही है। जितने भी बोर है उनमें से कईयों का पानी पीने लायक ही नहीं हैं। 


कहां हुई लापरवाही


वैसे तो इस वर्ष बरसात भी अच्छी हुई लेकिन लापरवाही के चलते वाटर वर्कस में पानी नहीं बचा सके क्योंकि अधिकारियों की अनदेखी के चलते किसानों ने फिल्टर के पानी से ही सिचांई कर डाली जब तक ध्यान दिया और मोंटरें बंद कराई तब तक बहुत देर हो चुकी थी। नगर में कभी भी जलस्तर सुधारने की चेष्टा ही नहीं की गई जब भी किसी वार्ड में पानी की समस्या हुई नया बोर करा दिया। कई वार्डों में तो कुछ फुटों के अंतर से ही बोरों का खनन कर दिया गया। इसलिए जलस्तर बहुत नीचे चला गया।


वाटर हार्वेस्टिंग कराने से होता फायदा


यदि सलाह मानकर नगरपालिका ने सभी वोरों पर रूफ वाटर हार्वेस्टिंग कराई होती तो इस बरसात के पानी से ही लगभग दो साल तक पानी की समस्या नहीं आती और राशि बचती सो अलग। क्योंकि हार्वेस्टिंग का खर्च बोर कराने की तुलना में न के बराबर होता है। केवल रखरखाव अच्छे से करना पड़ता है।


फिर होना है नए 35 बोर  


जल समस्या की बैठक में नगरपालिका परिषद में लगभग 60 लाख की राशि खर्च कर 35 नए बोर कराए जाने हैं। जिससे संभवत: जलसंकट में कमी आएगी। इसके अलावा 2 अतिरिक्त बोर टेंकर भरने के लिए और दो नए ट्रेक्टर परिवहन के लिए खरीदे जाने का प्रस्ताव भी नगरपालिका में पारित हुआ हैं अर्थात कुल लगभग 1 करोड़ की राशि पानी की तरह बहाई जाएगी लेकिन पानी मिलने की उम्मीद फिर भी नहीं की जा सकती क्योंकि बोर तो करा लिए जाएगे लेकिन वाटर लेबिल कहां से लाया जाएगा।


इनका कहना

यह बात सही है कि जल स्तर बहुत तेजी से गिरा है। बोर कराना मजबूरी है इस बार बोर पानी की उपलब्धता के आधार पर कराए जाएंगे। मैने अपना सुझाव भी रखा था कि परिवहन में कम खर्च आएगा। लेकिन बोर कराने का प्रस्ताव ही पारित हुआ है।

आरबीएस राजौरिया, सी एम ओ नगरपालिका, खुरई 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...