गढ़ाकोटा। बड़ा जैन मंदिर प्रांगण में सुबह आयोजित धर्मसभा में 108 मुनि अजित सागर महाराज ने धर्मावलम्बियो को संबोधित करते हुए कहा की कुछ बाते प्रदर्शन के बिना आकार ही नहीं ले पाती है। वही कुछ बाते प्रदर्शन करते ही अपना स्वरुप खो बैठती है।
संसार में प्रदर्शन को बड़ा महत्त्व दिया जाता है कभी -कभी तो दिखावा ही योग्यता बन जाता है दौलत और देह दोनों को वस्तु की तरह दर्शाया जाता है। दुनिया में यह दिखावा अहंकार और अवसाद दोनों को बढ़ाता है। इसी प्रकार जब उपलब्धि अध्यात्मिक होती है तो इसका प्रदर्शन नहीं हो सकता यह अनुभूति व्यक्त करते ही अपना स्वाद अपने अर्थ खो देती है। मुनिश्री ने कहा कि सफलता एक प्रकार से ऊपर चढ़ना ही है हम सफलता की सिड़ी कितनी ही चढ़ जाएं पर इसे अपने माथे पर न चड़ने दे विजय तिलक भले ही मस्तक पर हो, पर जीत हमें अहंकारी न बना दे इस पर ध्यान देना आवश्यक है।
मुनि सेवा संघ के सदस्य विक्की जैन ने बताया की मुनि अजित सागर जी ससंघ सुबह बसारी मार्ग पर स्थित गौशाला भ्रमण करने पहुंचे और वहा की व्यवस्थाओं को देखा एवं उपस्थित जन समुदाय से आह्वान भी किया की गौ माता की सेवा अवश्य करें। और जो लोग इन्हें घर पर नहीं पाल सकते वो गौ शाला जरुर आएं। मुनि श्री के आहार जैन समाज के महामंत्री रवीन्द्र उमरा वालो के यहां संपन्न हुए। इस अवसर पर अरुण मलैया, पदम बैशाखिया, जिनेश सोधिया, सुरेश सराफ, प्रेमचंद उमरा, सुनील अठभैया बल्लू सिमरिया, सुशील पटवारी, राकेश बाझल, पार्षद ऋषभ जैन उस्ताज, विजय नदरई, सचिन बैशाखिया, गणेश जैन सहित महिला मंडल एवं समाज के लोगो ने आशीर्वाद लिया।




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