सागर। वर्णी भवन मोराजी में विराजमान मुनिश्री भव्यसागर महाराज ने कहा कि पं. पन्नालाल जैन बुंदेलखंड के गौरव थे। जिन्होंने मुनिराजों को भी धर्म की शिक्षा दी थी। मुनिश्री वर्णी भवन मोराजी में पं. पन्नालाल जैन साहित्याचार्य की 13 वीं पुण्यतिथि पर आयोजित विनयाजंलि सभा को संबोधित कर रहे थे।
इस अवसर पर क्षुल्लक श्री ध्यानसागर महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि बुजुर्गो के संस्मरणों को सुनना चाहिए। उन्होंने आत्मध्यान, आत्मवान और आत्मज्ञान पर विस्तार पूर्वक चर्चा की। भक्ताम्बर के 22वें काव्य का उल्लेख करते हुए क्षुल्लक जी ने कहा कि उसमें लिखा है कि स्त्रीणामसतानी जयंती पुत्रम। अर्थात आचार्यो ने भी स्त्री का सम्मान किया है। जिसने भगवान को जन्म दिया। जिन्होंने जिनवाणी को सहेजा है। तो उनकी चर्चा करना भी जरूरी है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में धर्म प्रेमी बंधु उपस्थित थे।



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