गुरुवार, 17 जनवरी 2013

मोटरसाईकिल दुर्घटना में घायल एक और युवक की मौत

बीना। खिमलासा के पास मंगलवार को हुई मोटरसाईकिलों की दुर्घटना में घायल हुए तीसरे युवक की भी मौत सागर में इलाज के दौरान हो गई। दो घायल भोपाल में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। तीनों युवकों की मौत सिर में लगी गंभीर चोटों से हुई है।


यदि सभी ने हेलमेट पहने होते तो उनकी जान के साथ परिवारों की खुशियां भी उजड? से बच जातीं। खिमलासा थाना प्रभारी प्रमोद भास्कले ने बताया कि घायल सुम्मत पिता सुंदरदास गौड़ 24 वर्ष की सागर में इलाज के दौरान मौत हो गई है। मड़ारोन निवासी नेतराम पिता अमरसिंह अहिरवार 23 वर्ष एवं पथरिया निवासी नारायण अहिरवार 30 वर्ष को गंभीर हालत में सागर मेडीकल कॉलेज ले जाया गया था जहां से उन्हें भोपाल के लिए रेफर कर दिया गया उनका इलाज चल रहा है। 

गौरतलब है कि मंगलवार शाम को खिमलासा नर्सरी के पास दो मोटर साईकिलों की आमने सामने से जोरदार टक्कर हुई थी। जिसमे तेज रफ्तार के कारण गाड़ियों के परखच्चे उड़ गए थे एवं पथरिया निवासी सोनू अहिरवार पिता श्यामलाल अहिरवार 25 वर्ष एवं डिंडोरी निवासी सम्मर पिता गहरू सिंह गौड़ 25 वर्ष की घटना स्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई थी। डिंडोरी निवासी दोनों मृतक बीना क्षेत्र में चल रहे टावर लाईनों के काम में ठेकेदार बलराम राजपूत के अधीन मजदूरी करते थे। दोनों गरीब परिवार से हैं और रोजी-रोटी की तलाश में बीना दो माह पहले ही आए थे। मंगलवार को दोनों एक मोटरसाईकिल पर बैठकर बीना की तरफ आ रहे थे। 


हेलमेट से बच सकती थी जान 


दो पहिया वाहन पर सवारी करने वालों के लिए हेलमेट सबसे बड़ा सुरक्षा कवच माना गया है। दुर्घटना के समय जो मौतें होती हैं वह अधिकांश सिर में चोट लगने से ही होती हैं। इस दुर्घटना में जो तीन युवकों की मौतें हुई हैं वह भी सिर में चोट के कारण ही बताई जाती हैं। यदि सभी ने हेलमेट पहने होते तो शायद वह दुर्घटना इतनी खतरनाक रूप न ले पाती। 


पुलिस नहीं करती जांच 


जागरूकता के अभाव में जहां लोग नियम तोड़कर अपनी जान पर खेलते हैं वहीं कानून के रखवाले भी अपने दायित्वों के निर्वहन में कोताही बरतते हैं। बीना क्षेत्र में नई सड़कें बनने के बाद दर्जनों लोगों की जानें सड़क हादसों में जा चुकी हैं। लेकिन पुलिस बिना हेलमेट पहले चालकों पर कोई कार्रवाई नहीं करती। दुर्घटना में एक बात और सामने आई है कि एक बाईक पर तीन लोग बैठकर जा रहे थे जो नियम के विरूद्ध है। हाल में यातायात सप्ताह के दौरान पुलिस ने रस्म अदायगी की जागरूकता फैलाई थी लेकिन वह असर नहीं दिखा पाई। 

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