सागर। आज के परिवेश में साहित्य, संस्कृति के प्रति ज्यादा सजग रहने की आवश्यकता है। ऐसे आयोजन से जब विचारों का विनिमय और चिंतन होगा तो समाज को नई दिशा मिलेंगी। यह बात मुख्य अतिथि विशेष न्यायाधीश भारत भूषण श्रीवास्तव ने कहीं। वे मप्र हिन्दी साहित्य सम्मेलन के समापन अवसर पर बोल रहे थे। दो दिवसीय इस आयोजन के पहले दिन कार्यक्रम का उद्घाटन प्रोण् सुरेश आचार्य ने किया और हिंदी की आवश्यकता और स्थिति पर प्रकाश डाला।
इस मौके पर समाजसेवी जितेंद्र सिंह चावला ने हिन्दी साहित्य की नियमित पत्रिका के प्रकाशन को आवश्यक बताया। इसके साथ ही समाजसेवी शुकदेव तिवारी ने कहा कि ऐसे आयोजन साहित्य के लिए नहीं बल्कि समाज के लिए भी लिए भी जरूरी है। समापन समारोह के दौरान कार्यक्रम के विशेष अतिथि न्यायाधीश रामजी गुप्ता ने कहा कि सक्रिय रहकर हम अच्छे साहित्य का सृजन कर सक ते हैं।
इस मौके पर उन्होंने हिन्दी साहित्य और संस्कृति के साथ स्थापित आदर्शों की वर्तमान दिशा और दशा पर विचार व्यक्त किए। विशेष वक्ता प्रोण् सुरेश आचार्य ने कहा कि राजनैतिक प्रयासों के साथ समाज की स्थिति में परिवर्तन नहीं आएगा। इसके लिए कलमकारों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। मणीकांत चौबे ने कहा कि साहित्यिक गतिविधियों की सक्रियता के कारण सागर लंबे समय से साम्प्रदायिक तनाव से मुक्त है और साहित्यिक गतिविधियों में युवाओं की भागीदारी बढ़ी है।



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