गुरुवार, 17 जनवरी 2013

एक गर्दन के बदले पूरा पाकिस्तान चाहिए

बीना।  पाकिस्तान सेना द्वारा की गई दरिंदगी से देशवासियों को काफी आघात हुआ है। कवियों का कोमल हृदय भी इससे अछूता नहीं रहा है। मंगलवार को मकर संक्रांति पर्व पर आलोक साहित्य संस्था द्वारा काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया।

गोष्ठी में रचनाकारों ने पाकिस्तान पर अपनी भड़ास निकली। कवि महेन्द्र अभागा ने सारा विश्व सजदा करता है मेरे हिन्दुस्तान का, रिश्ते में ये गुरू है सबका, बाप है पाकिस्तान का। नामक कविता सुनाकर राष्ट्रप्रेम का जज्वा जगाया। गीतकार राधेश्याम जोशी ने भारतीय सैनिक की गर्दन काटने पर आक्रोश जताते हुए एक गर्दन के बदले हमको पूरा पाकिस्तान चाहिए। नामक पंक्तियां सुनाई। 

सीताराम चौरसिया ने नेताओं के काले कारनामों को कविता का माध्यम बनाया दीपेश मिश्रा ने यदि आदमी की पूंछ होती नामक व्यंग सुनाया। श्रीमति शकुंतला जैन, शैलेन्द्र जैन, दीपेश दीक्षित आदि कवियों ने कविताएं सुनाईं। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे। 

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