शुक्रवार, 18 जनवरी 2013

महामहोत्सव में सैकड़ों श्रोताओं ने किया कविता का रसपान

खुरई। जिनवाणी अस्थाप वेदी प्रतिष्ठा कलशारोहण तिलक महामहोत्सव पर आयोजित वृहद मंगलमय आयोजन पर लोकप्रिय लॉज के सामने बने तारण-तरण ज्ञान समवशरण सभा मंडप में विराट कवि सम्मेलन का आयोजन श्रीमंत धर्मेन्द्र सेठ के मुख्य आतित्थ्य एवं विजय बट्टी की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। मंच का संचालन सुनील समैया ने किया।


कवि सम्मेलन में राष्ट्र के विभिन्न अंचल से आऐ अब्दुल गफ्फार जयपुर, साजन ग्वालियरी ग्वालियर, ऋषभ जलज सागर, ब्रजेन्द्र चकोर धौलपुर, श्रीमति लता शबनम बालाघाट, रमेश विश्वहार रायपुर, राजकुमार वर्मा खण्डवा(न्यायाधीश), संजय कबीर बिलासपुर, रानू गुरहा खुरई, दिव्यांश समैया बीना आदि कवियों ने शिरकत की।


कवि सम्मेलन में अब्दुल गफ्फार ने अपना कविता पाठ करते हुए कहा कि छुआ-छूत औ ऊंच नीच का चारो तरफ अंधेरा था आडम्बर अन्याय, द्वेश ने जब जनता को घेरा था, ऐसे में एक महासूर्य ने आ के काज अनन्य किया। बालाघाट से आई कवियत्री लता शबनम ने कविता पाठ करते हुए कहा कि मुहब्बत चीज है दिल की, दिमागी हो नहीं सकती, हर दिल की चहेती है, अभागी हो नहीं सकती, जमाना सैकड़ों इल्जाम चाहे जो लगा ले उस पर, ये पावन भावना है, जो कि दागी हो नहीं सकती। 

कवि सम्मेलन के उपरांत आयोजकों द्वारा जीव-दया के लिए समर्पित प्रचार-प्रसार समिति के प्रमुख अशोक शाकाहार का सम्मान किया। कवि सम्मेलन के पूर्व कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि श्रीमंत धर्मेन्द्र सेठ एवं अध्यक्षता कर रहे विजय बट्टी ने कवियों का सम्मान श्रीफल शाल एवं प्रतीक चिन्ह देकर किया।

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