सागर। सड़क सुरक्षा सप्ताह के चलते पुलिस अधिकारियों ने सिविल लाइंस स्थित चंद्रापार्क में यातायात विषय पर चित्रकला एवं स्लोगन प्रतियोगिता का आयोजन किया। किसी भी शहर की यातायात व्यवस्था उस शहर का आइना होती है विषय पर वाद -विवाद प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें स्कूली छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया।
इस अवसर पर पुलिस अधीक्षक अभय सिंह, एडीशनल एसपी डीआर तेनीवार, यातायात प्रभारी अरविंद तिवारी, मयंक सिंह चौहान, अजित सिंह चौहान, आरएस भदौरिया आदि उपस्थित थे।
छात्रों को दी यातायात की जानकारी
बीना। उत्कृष्ट विद्यालय प्रांगण में छात्र-छात्राओं को यातायात संबंधी जानकारी पुलिस द्वारा दी गई। स्कूल प्रबंधन द्वारा की गई नाकाफी व्यवस्थाओं से बच्चे परेशान नजर आए। उधर दी गई जानकारी भी रस्म आदयगी जैसी लगी। कक्षा नवमीं एवं दसवीं के छात्र-छात्राओं को जानकारी देने के लिए बाहर प्रांगण में एकट्ठा किया गया। जहां बैठने की व्यवस्था ठीक न होने से बच्चों को काफी असुविधा का सामना करना पड़ा।
सभी बच्चे पंजों के बल बैठे रहे। जानकारी देने वालों ने भी कागज पर लिखे नियम को पुलिस गाड़ी पर लगे छोटे लाउण्डस्पीकर की सहायता से पढ़कर सुनाया। बच्चों को 16 वर्ष की आयु होने पर लर्निंग लायसेंस बनने के बाद वाहन चलाने की सीख दी गई। पुलिस ने कुछ अन्य नियम सुनाकर कार्यक्रम की समाप्ती की। पत्रकारों के कहने पर चार-पांच मुद्राएं कर के दिखाई गईं। इस अवसर पर प्राचार्य एमएम पटेल, उपनिरीक्षक पारूल राठौर, कमलेश पाठक, संतोष तिवारी, कमलसिंह पायक, ओवेद खान सहित विद्यालयीन स्टाफ मौजूद था।
सभी बच्चे पंजों के बल बैठे रहे। जानकारी देने वालों ने भी कागज पर लिखे नियम को पुलिस गाड़ी पर लगे छोटे लाउण्डस्पीकर की सहायता से पढ़कर सुनाया। बच्चों को 16 वर्ष की आयु होने पर लर्निंग लायसेंस बनने के बाद वाहन चलाने की सीख दी गई। पुलिस ने कुछ अन्य नियम सुनाकर कार्यक्रम की समाप्ती की। पत्रकारों के कहने पर चार-पांच मुद्राएं कर के दिखाई गईं। इस अवसर पर प्राचार्य एमएम पटेल, उपनिरीक्षक पारूल राठौर, कमलेश पाठक, संतोष तिवारी, कमलसिंह पायक, ओवेद खान सहित विद्यालयीन स्टाफ मौजूद था।
जमीन पर कराया सूर्य नमस्कार
पुलिस का कार्यक्रम समाप्त होते ही स्कूल प्रबंधन ने उसी स्थान पर सूर्य नमस्कार की रिहर्सल कर डाली। बच्चों को बिना मन के दबाव में धूल के बीच लेटकर आसन करने पड़े। उनके कपड़े धूल गंदगी के कारण खराब हो गए। आसन सिखाने का जिम्मा भी छात्रों को ही सौंपा गया था। शिक्षक सिर्फ सीटी बजाने का कार्य करते नजर आए।






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