बीना। परिवार कल्याण कार्यक्रम महिलाओं की नसबंदी पर ही सीमित होकर रह गया है। पुरूष नसबंदी कराओ पति नंबर वन कहलाओ एवं स्वास्थ्य विभाग अमला पुरूष वादी सोच को बदलने में विफल होता नजर आ रहा है। बीना में करीब दो हजार आपरेशनों के लक्ष्य पर दस पुरूषों की भी नसबंदी नहीं हो सकी है। पूरा कार्यक्रम महिलाओं के माथे मढ़ दिया गया है।
शहर में कर्मचारी महिला नसबंदी में भी काफी पीछे है। 1 अपैल 2012 से परिवार कल्याण कार्यक्रम का लक्ष्य निर्धारित हुआ जिसमें ग्रामीण क्षेत्र के लिए 1350 नसबंदी आॅपरेशनों एवं शहरी क्षेत्र में 650 आॅपरेशनों का लक्ष्य रखा गया। नौ माह बीतने के बाद ग्रामीण क्षेत्र में कुल 443 महिलाओं के आॅपरेशन हुए जो लक्ष्य का 40 फीसदी भी नहीं है इसी तरह शहरी क्षेत्र में 650 के मुकाबले 88 महिलाओं की ही नसबंदी हो सकी है। अब लक्ष्य भेदने के लिए विभाग के पास कुल तीन माह ही बचे हैं। पिछले वर्ष ग्रामीण क्षेत्र में 1200 आॅपरेशन हुए थे।
शहरी क्षेत्र में 385 पर ही ग्राफ थम गया था। बीन शहर में राम वार्ड, मस्जिद वार्ड आदि में कई लक्ष्य दंपत्ति है। लेकिन स्वास्थ्य अमला यहां पर परिवार नियोजन को जनमानस तक पहुंचने में असफल रहा है। विकासखंड स्तर पर जो शिविर आयोजित किए जाते हैं वह लापरवाही से घिरे रहते हैं। जिस कारण पढ़े लिखे लोग उनमें जाने से हिचकिचाते हैं।
महिलाएं ही हैं निशाने पर
पुरूषवादी समाज में सारी जिम्मेवारियां महिलाओं के माथे ही मढ़ी जाती हैं। शासन प्रशासन भी अपने लक्ष्य उन्हीं पर लाद देता है। स्वास्थ्य विभाग ने पुरूष नसबंदी का जो लक्ष्य बनाया है वही उपेक्षापूर्ण है। शासन ने कुल महिलाओं की नसबंदी पर 10 प्रतिशत पुरूष नसबंदी का लक्ष्य बनाया है। 9 माह में शहरी क्षेत्र में 4 और ग्रामीण क्षेत्र में 4 पुरूषों की ही नसबंदी हो सकी है। पुरूषों की नसबंदी महिलाओं की नसबंदी की उपेक्षा कम जोखिम पूर्ण होती है। बाद में किसी कारण पुन: नसबंदी खुलवाने में पुरूषों को काफी आसानी होती है।
दो दर्जन की नसबंदी हुई फेल
महिलाओं के जो पिछले वर्ष आॅपरेशन किए गए उनमें से करीब 23 महिलाओं की नसबंदी फेल हो गई। बीएमओ डॉ.संजीव अग्रवाल ने बताया कि सभी महिलाओं के केस बीमा कंपनी को भेजे गए हैं। उन्हें निर्धारित राशि उपलबध कराई जाएगी। इस बार अभी तक कोई मामला सामने नहीं आया है। उधर कई कर्मचारी गरीब महिलाओं की अशिक्षा का लाभ उठाकर उन्हें रूपयों का लालच देकर नसबंदी करवा रहे हैं।



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