गुरुवार, 24 जनवरी 2013

सागर-गढ़पहरा मार्ग पर यात्री बसों का संचालन बंद

सागर।  सागर से गढ़पहरा का मार्ग पिछले दिनों की बारिश से बड़े-बड़े गड्ढों में तब्दील हो गया है। गड्ढों में ट्रकों के गिरने से टूटफूट बढ़ गई है। साथ ही कई-कई घंटों आवागमन में भी अवरोध पैदा होता है। सड़क कई स्थानों पर उखड़ गई और रोड पर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं।

 इस रोड की बदहाली से ऐतिहासिक व पुरातत्व महत्व के स्थान गढ़पहरा में श्री हनुमान जी मंदिर जाने वाले भक्तों की संख्या एक साल में घटकर दस प्रतिशत से भी कम हो गई है। जबकि पहले यह मंदिर यहां आने वाले भक्तों के कारण हमेशा खचाखच भरा रहता था। इस रोड के बड़े-बड़े गड्ढों के कारण मार्ग पर चलने वाली मध्यप्रदेश व उत्तरप्रदेश की दो दर्जन से अधिक यात्री बसों का संचालन भी करीब आठ माह से बंद है। 

हाइवे की इस दुर्दशा के चलते यात्री बसों को जंगली रास्तों से दस से पंद्रह किलोमीटर घूमकर निकलना पड़ रहा है।  प्रशासन ने अभी तक सडक की मरम्मत कराने की जहमत नहीं उठाई गई है। उल्लेखनीय है कि  जब से भारतीय राष्टद्द्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा फोनलेन रोड का निर्माण किया गया है। तब से सागर से रानीपुरा गढ़पहरा मार्ग के अलावा बाईपास वाले ग्राम बांदरी, बरौदियाकलां, मेंहर के पुराने हाइवे खराब हालत में हैं। 


नहीं किया जा रहा रखरखाव


उत्तर-दक्षिण कारीडोर के तहत करोड़ों की लागत से राष्टÑीय राजमार्ग क्रमांक 26 पर पुल-पुलियों का निर्माण किया गया है। लेकिन फोर लेन को जोड़ने वाली सड़कों का कोई रखरखाव नहीं किया जा रहा है। वर्तमान में सडकों की हालत इतनी खराब हो गई है कि पैदल भी लोग चलने से   कतराते हैं। सागर से गढ़पहरा, मेंहर धसान पुल से खेजरा, बांदरी, रजवांस, बरौदिया, मालथौन की सड़के अत्यंत जर्जर हालत में हैंं।  सूत्रों ने बताया कि इन सड़कों का रखरखाव कराने का जिम्मा फोरलेन कंपनियों का है। लेकिन रखरखाव के नाम पर सडकों पर कुछ भी नहीं किया जा रहा है। कमोवेश राजमार्ग के अन्य पुल-पुलियों के निर्माण की भी यही स्थिति है। 


जर्जर हो गई सड़के 


हाइवे की सडक पर भी बड़े-बड़े गड्ढे होने से वाहन फंस रहे हैं। लेकिन इस ओर प्रशासन द्वारा ध्यान नहीं दिया जा रहा है। बताया गया है कि  फोरलेन बनाने में लगे भारी वाहनों के दबाव से सागर से रानीपुरा गढ़पहरा मार्ग के अलावा बाईपास वाले ग्राम बांदरी, बरौदियाकलां, मेंहर के पुराने हाइवे खराब हालत में हैं। इन स्थानों की सडकें जगह-जगह उखड़ गई है और पूरी सडक में बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। जिससे आए दिन जाम के दौरान बड़ी संख्या में ट्रकों तथा अन्य वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं। ट्रक एसोसिएशन के संचालकों का कहना है कि ठेकेदारों द्वारा आदेश का मखौल उड़ाया जा रहा है। सागर से रानीपुरा गढ़पहरा मार्ग के अलावा बाईपास वाले ग्राम बांदरी, बरौदियाकलां, मेंहर में वाहन हिचकोलें लेने लगते हैं। ललितपुर के वाहन चालक महेन्द्र राय ने बताया कि जब भी वे रानीपुरा से आगे सागर की ओर अपना ट्रक लेकर आए हैं, तभी कोई न कोई परेशानी हुई है। उन्होंने बताया कि बुधवार को जब वह ट्रक लेकर आ रहे थे तो उसको गिट्टी लगने से टायर फट गया। किराये की तवेरा चलाने वाले चालक मनोज चंद्रवंशी दमोह ने बताया कि लगभग  पंद्रह किलोमीटर हाइवे की यह सडक-सडक कहलाने योग्य ही नहीं है। 


उड़ते हैं धूल के गुबार


 झांसी -लखनादौन सेक्शन के बीच में सागर से रानीपुरा गढ़पहरा मार्ग के अलावा बाईपास वाले ग्राम बांदरी, बरौदियाकलां, मेंहर मार्ग की सड़क के उखड़ जाने तथा बड़े-बड़े गड्ढों के हो जाने चौबीस घंटे सडक पर धूल के गुबार उड़ते रहते हैं। इससे वाहन चालकों को वाहन चलाना मुश्किल हो गया है। यही नहीं वाहनों के पलटने की घटनाएं आम हो गई हैं। धूल के गुबारों से दर्जनों गांव में बीमारी भी फैल रही है। सडक किनारे बसे बच्चों के फेफड़े कमजोर हो रहे हैं।  यातायात जनित प्रदूषण बढ़ने से यह समस्या पैदा हो रही है। मेंहर गांव के संदीप शकवार ने बताया कि कि बच्चों के फेफड़ों में हुए दुष्प्रभाव का वे जबलपुर में एक विशेषज्ञ चिकित्सक से इलाज कर रहे हैैं। चिकित्सक डॉ. संजीव मुखारया भी बताते हैं कि प्रदूषण से फेफड़े पर पड़ने वाले दुष्प्रभाव में इजाफा हो जाता है। सडकों पर उड़ने वाली धूल से भी लोगों में दमा, स्वांस, अस्थमा आदि की बीमारियां तेजी से फैल रहीं हैं। 

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