मंगलवार, 19 फ़रवरी 2013

स्वास्थ्य केन्द्र में मरीजों की जान को खतरा

खुरई। जहां करोड़ों रुपए खर्च करके प्रदेश सरकार प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बताकर स्वर्णिम मध्यप्रदेश की कल्पना करने में लगी है वहीं स्वास्थ्य सेवाओं के इस सपने को डाक्टर पलीता लगाने में लगे है। शनिवार के दिन खुरई के सामूदायिक स्वास्थ्य केंद्र में ओपीडी डाक्टरों ने नहीं एक नेत्र सहायक ने चलाई क्योंकि सभी सीनियर डाक्टर न तो समय पर आए जो आए वे दस मिनट भी नहीं टिक सके।

जबकि यहां पर 7 डाक्टरों की पदस्थापना है। जहां मात्र 5 हजार रुपए मासिक वेतन मिलने वाले शिक्षकों को प्रशासनिक अधिकारी समय पर न आने या अनुपस्थित रहने पर उनका वेतन काट लेते हैं। लेकिन जिन डाक्टरों को दो दिन में इतना वेतन मिलता हो उन पर कोई कार्यवाही आजतक नहीं की जाती है।


नदारात रहते हैं डाक्टर


नगर के सामूदायिक स्वास्थ्य केंद्र में 7 डाक्टर पदस्थ है लेकिन एक भी समय पर उपलब्ध नहीं रहते हैं। शनिवार को ओपीडी प्रारंभ होने के बाद 9.20 सुबह डॉ पीएस नेमा ओपीडी आए और दस मिनट बैठने के बाद सब्जी लेकर घर गए तो फिर वापस नहीं लौटे। डॉ. डीबीएस चौहान 10.50 पर आए और 20 मिनट ओपीडी में देकर चले गए। इन दो डाक्टरों के अलावा एक महिला डाक्टर की ड्यूटी आफ थी तो एक महिला डाक्टर ने छुट्टी ले रखी थी। शेष तीन डाक्टर मेडीकल   विशेषज्ञ वीरेन्द्र यादव,डॉ. व्हीके फुसकेले, डॉ. एस स्टीफन नदारत रहीं। ओपीडी को केवल नेत्र सहायक केएन कुशवाहा ने अपना काम छोड़ कर चलाया। जितने भी मरीज इस दौरान आए नेत्र सहायक को बैठा देख चले गए क्योंकि सभी जानते हैं कि ये केवल नेत्र चेक करते है। महावीर वार्ड के सतीश सेन पिता घनश्याम सेन ने बताया कि वह अपने बच्चे के इलाज के लिए आया था लेकिन मजबूर में प्राइवेट अस्पताल में इलाज कराना पड़ा।


महीनों में कुछ दिन आते हैं डाक्टर


वैसे तो सभी डाक्टर अपनी ड्यूटी में लापरवाही कर रहे हैं क्योंकि तीन डाक्टर तो सागर से उप डाऊन करते है। मेडीकल विशेषज्ञ डॉ वीरेन्द्र यादव तो महीने में कुछ दिन ही आते हैं आते भी तो कब चले जाते हैं किसी को नहीं पता चलता हैं। पिछले छै: महीनों में कुछ ही दिन आए हैं। मरीजों की तो छोड़ों अधिकतर मीडियाकर्मी तक इन डाक्टर को नहीं पहचानते है जबकि इनको एक लंबा समय यहां आए हो गया है।


मरीजों की जान को खतरा


नगर एवं ग्रामीण इलाको की कई  लाख जनसंख्या की जिम्मेदारी इस स्वास्थ्य केन्द्र पर है। मेडीकल विशेषज्ञों की अनुपस्थिति में यदि कोई गलत दवाया इंजेशन किसी मरीज को लग जाए तो और कोई बड़ी घटना हो जाए तो इसका जिम्मेदार कौन होगा। ऐसा नहीं है कि यह पहला मामला हो कि नेत्र सहायक ने ओपीडी चलाई हो। कई बार ऐसा समय आ जाता है। जब सीनियर डाक्टर अपना रोब झाड़कर नेत्र सहायक को अपने बदले ओपीडी में बैठा कर चले जाते है जैसे ओपीडी न हुई कोई किराने की दुकान हो गई कि कोई भी चला ले।


रात में सबसे खराब स्थिति बनती है


जब दिन में ही ऐसी स्थिति रहती हो तो अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है कि रात में क्या स्थिति बनती होगी। रात में यदि कोई एक्सीडेंट आ जाए या कोई गंभीर मरीज आ जाए तो उसको समय पर इलाज मिल नहीं सकता क्योंकि डाक्टरों का आने जाने का समय निश्चित नहीं है। कई बार तो बड़े एक्सीडेंटों के घायलों को घंटो इलाज नहीं मिला क्योंकि डाक्टर अपने समय की ड्यूटी निभाने नहीं आते।

इस संबंध में जब बीएमओ डाक्टर शेखर श्रीवास्तव से पूछा तो उन्होंने बताया कि सभी सीनियर डाक्टर हैं अपनी अपनी जिम्मेदारी समझना चाहिए। सभी को हर दिन पूरा समय देने की सलाह दी जाएगी। प्रभारी जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. ऐके बड़ौन्या से बात होने पर उन्होंने ने भी काई सही जबाब नहीं दिया।

इनका कहना है
अभी तक इस संबंध में काई शिकायत नही मिली है। यदि शिकायत मिलती है तो कार्रवाई की जाएगी। इस संबध में बीएमओ को निर्देश दिए जाएंगे कि सभी डाक्टरों की समय पर ड्यूटी को चेक करें।
डॉ. ऐके बड़ौन्या, जिला चिकित्सा अधिकारी

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