खुरई । नगर में सर्वत्र नाबालिग बच्चे चाहे दुपहिया वाहन हो या चार पहिया वाहन हो, कभी भी आसानी से चलाते हुए देखे जा सकते हैं। जिन्हें वाहन चलाने का पूर्ण अनुभव नहीं होने के कारण हादसों का शिकार हो जाते हैं। वहीं दूसरी ओर अभिभावक भी इस ओर ध्यान नहीं देते हैं और अपने बच्चों को बे रोकटोक वाहन चलाने दे देते हैं।
सबसे अधिक बच्चे स्कूलों में वाहन के माध्यम से ही आवागमन करते आसानी से देखे जा सकते हैं। सारी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की ही न रहकर आम नागरिक, अभिभावक, शैक्षणिक संस्थाओं आदि की भी रहती है, परंतु सभी मूक दर्शक बने यह सब देखते रहते हैं और किसी बडे हादसे का इंतजार करते नजर आते हैं। जहां शासन द्वारा ट्रैफिक नियमों का ज्ञान हर स्कूलों, कालेजों में कराया जाता है यहां तक की सड़क सुरक्षा, यातायात सुरक्षा सप्ताह आदि भी पुलिस विभाग द्वारा मनाया जाता है और पुलिस कर्मी जगह जगह जागकर ट्रैफिक नियमों की जानकारी देते नजर आ सकते हैं।
वहीं पुलिस प्रशासन ही इन ट्रैफिक नियमों को तोड़ता नजर आए तो इस व्यवस्था को क्या कहा जा सकता है। ऐसा ही एक मामला मंगलवार के दिन शहीद अरूण चौक के पास देखने को मिला जब नाबालिग बच्चे पुलिस का दो पहिया वाहन एम.पी.15 एम.के.4241 पर तीन नाबालिग बच्चे वाहन चलाते नजर आए। ये बच्चे वाहन को कलाबाजी दिखाते हुए तेज गति से वाहन चला रहे थे जिससे आसपास के लोगों में कुछ समय के लिए दहशत का माहौल व्याप्त हो गया, और सभी आश्चर्य से पुलिस वाहन को देखते रहे और दबी जवान में लोग कह रहे थे जब सैंया भये कोतवाल तो डर मोहे काहे का।




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