रविवार, 17 फ़रवरी 2013

भक्तांबर पाठ की महिमा अपरंपार : माताजी

सागर। नमकमंडी स्थित श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में 1 जनवरी से 17 फरवरी तक लगातार 48 दिन चला श्री भक्तांबर पाठ का समापन आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज की परम शिष्या आर्यिका प्रभावनामति माताजी के ससंघ सानिध्य में नगर परिक्रमा के साथ हो गया।

इस अवसर पर आर्यिका भावनामति माताजी ने कहा कि भक्तांबर पाठ की महिमा अपरंपार है। आकुलता के कारण तुच्छ परिणाम आते हैं। लेकिन भावों के कारण व्यक्ति अमर हो जाता है। पूजन उनकी सार्थक होती है, जिनके भाव उच्च होते हैं। श्रावक प्रभु के पास अपनी आत्मा की विशुद्धि के लिए जाते हैं, अभिषेक करते हैं। आर्यिका श्री ने कहा कि मंदिर में प्रवेष के पूर्व जैंसे हम जूते चप्पल बाहर उतारकर अंदर प्रवेष करते हैं, उसी समय अपने भावों को निर्मल करते हुए केवल भगवान की प्रतिमा को देखते हुए दर्शन करना चाहिए। 

प्रवचनों के पूर्व सुबह हवन का कार्यक्रम हुआ। दोपहर में श्रीजी की शोभायात्रा विजय टाकीज, बाहुबली कालोनी, वर्णी कालोनी से होकर वापिस नमकमंडी पहुंची। जहां पर श्रीजी का अभिषेक किया गया। पं ऋषभ जैन ने विधि विधान से पूजा अर्चना कराई।


दीक्षा दिवस 20 फरवरी को


सागर। वर्णी कालोनी में विराजमान आर्यिका प्रभावनामति माताजी, भावनामति माताजी और सदयमति माताजी का दीक्षा दिवस 20 फरवरी को वर्णी कालोनी में मनाया जाएगा। इस अवसर पर आर्यिका संघ के मंगल प्रवचन भी होंगे।

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