खुरई। कहावत है कि जब बाढ़ ही खेत खाने लगे तो कौन रखवाली करे। ऐसी ही कहावत एक पुलिस कर्मी पर चरितार्थ होती है। यदि किसी आम नागरिक को किसी गुंडे से परेशानी हो तो वह पुलिस के पास जाता है लेकिन जब पुलिस ही गुंडा गर्दी करने लगे तो किससे शिकायत की जाए।
मामला न्यायालय के पीछे महावीर वार्ड का है। जहां बालजीत पिता स्व.राजकुमार केशरवानी का मकान हैं। इनका दोष केवल इतना था कि इन्होंने एक पुलिस कर्मी संजय तिवारी को एक साल पहले किराए से मकान दे दिया। जिसका ट्रांसफर छै: माह पहले सागर हो गया तभी से अपना मकान खाली करने के लिए कह रहे है। लेकिन उसने मकान खाली करने के बजाय अपने रिश्तेदार संजय मिश्रा और उसकी पत्नी सुनीता मिश्रा को दे दिया। कई बार कहने पर भी वे मकान खाली नहीं कर रहे। संजय तिवारी सागर में किसी डीएसपी का वाहन चालक बताया जा रहा है।
झूठे मामले में फंसाने की धमकी
एक तो छह माह से किराया नहीं दिया और मकान खाली करने का कहने पर संजय तिवारी अपनी पुलिसिया रौब दिखते हुए किसी झूठे मामले में फंसाने की धमकी देता रहता है। वर्तमान में रह रहा परिवार मकान मालिक के परिवार से गाली गलौच करता है और दैनिक कार्य करने में भी परेशानी पैदा करता है मकान मालिका को ही अपने कमरे के सामने से निकलने से मना करता है। मानवता की सभी हदे तो इस परिवार ने तब पार कर दी जब कुछ दिन पूर्व उनके पिता की मौत पर शव यात्रा निकलते ही किराएदार की अ ने मातम वाले घर में पटाखे फोड़े।
पुलिस विभाग नहीं कर रहा कार्रवाई
इस समस्या की शिकायत पीड़ित केशरवानी परिवार ने थाना प्रभारी से लेकर पुलिस अधीक्षक तक की है लेकिन अभी तक कोई रियायत परेशान परिवार को नहीं मिली है। पुलिस अधीक्षक को इसकी शिकायत तीन माह में दो बार ककी जा चुकी है। पीड़ित परिवार के एक सदस्य ने बताया कि थाना प्रभारी यूके चौकसे से जब मकान खाली कराने में सहयोग करने की बात कही तो कहा गया कि मकान खाली नहीं होगा। किराएदार की दबंगई का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है। कि कुछ समय पहले पदस्त एसआई रीता सिंह ने मकान खाली कराने की बात कही तो उल्टे उनसे ही अभद्रता की गई।
इनका कहना है
इस मामले की जानकारी अभी नहीं है। जानकारी लेकर पीड़ित परिवार का सहयोग किया जाएगा। ऐसे मामलों से पुलिस की छवि खराब होती है। ऐसा नहीं होने देंगे। तुरंत ही मकान खाली कराया जाएगा।
सीके आर्य, एसडीओपी खुरई



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