बीना। कृषि मंडी अध्यक्ष के आरक्षण को लेकर दिल्ली सुप्रीम कोर्ट में एक आदिवासी द्वारा दायर याचिका की सुनवाई 3 जनवरी को की जाना है। 3 जनवरी के पूर्व ही शासन मंडी अध्यक्षों के चुनाव कराके चैन की सांस लेना चाहता है इसलिए जल्द ही राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशन के साथ ही 3 जनवरी के पूर्व मंडी अध्यक्ष के चुनाव संपन्न होने की संभावनाओं को देखते हुए मंडी अध्यक्ष पद के प्रबल दावेदार सक्रिय हो गए हैं।
बीना मंडी अध्यक्ष पद सामान्य वर्ग के लिए आरक्षित है जिसमें प्रमुख रूप से दो दावेदार उभरकर सामने आ रहे हैं। वार्ड क्रमांक 1 पिपरासर वार्ड से विजयी प्रत्याशी सुनील सीरोठिया और वार्ड क्रमांक 10 बीना से जीतने वालीं महिला प्रत्याशी श्रीमति प्रीति नायक की दावेदारी अध्यक्ष पद के लिए जताई जा रही है।
मुद्दाविहीन चुनाव में वोट खरीद फरोख्त की चर्चा
कृषि मंडी चुनाव किसानों के हितों के लिए चुने हुए जनप्रतिनिधियों द्वारा किसानों को विभिन्न सुविधाओं का लाभ दिलाने के लिए होते थे किंतु इस बार मंडी चुनाव मुद्दाविहीन रहे जहां न तो प्रत्याशियों ने किसानों के भले की बात कही और न ही अपना कोई घोषणा पत्र जारी किया। मंडी चुनाव में शराब और रूपयों का खेल दिल से खेला गया। कई लोग शराब और पैसा बांटते देखे गए किंतु भला हो पुलिस प्रशासन का जिन्होनें इस तरफ से अपनी आंखे बंद रखीं। अन्यथा सैकड़ों लोगों को जेल की हवा खाना पड़ सकती थी।
बिकने के लिए तैयार हैं मंडी सदस्य
कृषि मंडी आम तौर पर कृषि संबंधी उपज खरीदने बेचने का स्थान होती है। किंतु मंडी के इस बाजार में अब हालही में सदस्य का चुनाव जीतकर आने वाले मंडी सदस्य भी मंडी अध्यक्ष पद के दावेदारों के पास अपनी कीमत लेकर खुद बिकने के लिए तैयार हैं। सूत्रों के अनुसार एक मंडी अध्यक्ष पद के दावेदार लगभग 11 लाख रुपए मूल्य की स्कार्पियो गाड़ी प्रत्येक सदस्य को देकर उनका वोट अपने पक्ष में करने का पांसा फेंक चुके हैं। कई मंडी सदस्य यह कहते भी नजर आ रहे हैं कि गाड़ी लेकर डीजल पेट्रोल का खर्च कौन बढ़ाएगा इसलिए हमें तो पैसा ही चाहिए।
कानून से मजाक और भ्रष्टाचार को बढ़ावा
मंडी अध्यक्ष के चुनाव के पूर्व लाखों रुपए के लेन देन की चर्चाएं, अध्यक्ष बनने के लिए सदस्यों को खरीदने और बेचने के लिए उनके दलालों की सक्रियता देखकर ऐसा लगता है मानो कानून के साथ मजाक किया जा रहा हो। जब मंडी अध्यक्ष लाखों रुपए देकर अध्यक्ष बनेगा तो स्वाभाविक रूप से करोड़ों का भ्रष्टाचार भी करेगा। एक तरफ समाज में भ्रष्टाचार को बर्दाश्त न करने की बातें की जाती हैं वहीं दूसरी ओर मंडी अध्यक्ष पद के लिए सदस्यों की खरीद फरोख्त रोकने कोई कड़ा कदम शासन और प्रशासन नहीं उठा रहा है।



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