गुरुवार, 10 जनवरी 2013

रूक्मणी का विवाह धूमधाम से मनाया


रजवांस।  ग्राम रोंड़ा में आयोजित की जा रही श्रीमद्भागवत कथा के दौरान कथा द्वारका में बदल गया। द्वारका में भगवान श्रीकृष्ण और रूक्मणी का विवाह बड़े ही धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान हजारों की संख्या में मौजूद धर्मप्रेमियों ने कृष्ण - रूक्मणी के पैर पखारे। विवाह उत्सव के दौरान संत श्री बालविदुशी रत्नेष्वरी देवी व भजन गायक पप्पू महाराज द्वारा प्रस्तुत किए गए भजनों के दौरान श्रद्धालू अपने लिए रोक नहीं पाए और जमकर नाचे। बाल विदुषी रत्नेश्वरीदेवी ने भगवान श्री कृष्ण के विवाह प्रसंग पर प्रकाश डाला। 


उन्होंने कहा कि रूक्मणी भगवान की माया के समान थीं। रूक्मणी ने मन ही मन यह निश्चय किया था कि भगवान श्री कृष्ण ही मेरे लिए योग्य पति हैं। पर रूक्मी श्री कृष्ण से द्वेष रखता था इससे उसने उस विवाह को रोककर शिशुपाल को रूक्मणी का पति बनाने का निश्चय किया । इससे रूक्मणी को बड़ा दुख हुआ और उन्होंने अपने एक विश्वासपात्र को भगवान श्री कृष्ण के पास भेजा। साथ ही अपने आने का प्रायोजन बताया। इसके बाद श्रीकृष्ण जी विदर्भ देश में जा पहुंचे। उधर रूक्मिणी का शिशुपाल के साथ विवाह होने की तैयारियां हो रहीं थीं । परन्तु उनकी प्रार्थना का असर हुआ और बाद में श्री कृष्ण का विवाह रूक्मणी के साथ हुआ। ग्राम रोंड़ा में आयोजित की जा रही श्रीमदभागवत कथा में आज कथा का रसपान करने जरूआखेड़ा, बरौदियाकलां, रजवांस,बीना, पाली से भी बड़ी संख्या में भक्तजन व जनप्रतिनिधि व अधिकारी, पत्रकार शामिल हुए।


नि:शुल्क चिकित्सा शिविर



सागर। हरे माधव परमार्थ सत्संग समिति माधवनगर शाखा द्वारा लाइफ केयर हास्पिटल के सहयोग से हरे माधव सत्संग भवन में निशुल्क सेवा शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में नागरिकों ने निशुल्क चिकित्सा का लाभ उठाया। 

डॉ. एचएस साहू ने 35 चर्म रोगियों एवं डॉ. अनूप साहू ने 40 उच्च रक्तचाप रोगियों डॉ. अर्चना श्रीवास्तव ने 35 प्रसूति महिला रोगियों एवं डॉ. मनोज सैनी ने 22 रोगियों की निशुल्क ईसीजी की सभी मरीजों को दवाइयां एवं चिकित्सीय परीक्षण परामर्श दिया गया। 40 मधुमेह रोगियों की भी शुगर की जांच निशुल्क की गई। इस शिविर के आयोजन का वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. हरीशंकर साहू ने समिति का सार्थ जनसेवा का सराहनीय प्रेरणादयी प्रयास बताया। इस अवसर पर समिति की ओर से शिविर में चिकित्सा सेवा करने वाले चिकित्सकों को स्मृति चिन्ह देकर सम्मान किया। 

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