उसमें आम के फूल लहरा रहे हैं। कृषक ने बताया कि करीब पन्द्रह साल पहले सागर से आम लाये थे और आम खाकर उसकी गुठली उनकी मॉं भागवतीबाई ने लगा दी थी, जो आज पेड़ के रूप में तैयार हो गया है और इस पेड़ में आम के मौसम में मीठा आम लगता है तथा पहली बार बिन मौसम बौर आया है।



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