बीना। भले ही औद्योगिक विकास से शहर का नाम भारत के मानचित्र पर अंकित हो गया हो, मगर यहाँ की बदहाल यातायात व्यवस्था सारे विकास को मुँह चिढ़ा रही है। प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा इस व्यवस्था को सुधारने की कवायद तो की जाती है, लेकिन यह कवायद बैठकों तक ही सीमित रहती है।
शहर की यातायात व्यवस्था बद से बदतर हो चुकी है। अधिकारियों द्वारा इसे सुधारने की कवायद बैठकों तक ही सीमित रहने से यातायात व्यवस्था लगातार बिगड़ती जा रही है। दिन के समय में शहर में लगातार हो रही भारी वाहनों की आवाजाही वाहन चालकों को मुसीबत बन चुकी है। रिफाइनरी एवं जेपी पॉवर प्लांट जाने-आने वाले लंबे-लंबे ट्राले दिन में कई बार जाम की स्थिति पैदा करते देखे जा सकते हैं।
इसके अलावा दुकानों के आगे सड़क के दोनों किनारे पर बेतरतीब दोपहिया एवं चार पहिया वाहनों के खड़े रहने से भारी वाहनों के निकलते समय आवागमन अवरुद्ध हो जाता है। कई दुकानदार तो सुबह होते ही सड़क की पटरी पर ही सामान जमाकर अतिक्रमण कर लेते हैं। गांधी तिराहे से अंबेडकर चौक, झांसी रेलवे फाटक एवं सागर रेलवे फाटक तक किए गए दुकानदारों के अतिक्रमण का नजारा प्रशासनिक अधिकारियों को दिखाई नहीं देता है, जबकि सारे अधिकारियों का इन मार्गों पर रोजाना आना-जाना बना रहता है।
औपचारिकता पूरी करने की जाती है बैठकें
नए अधिकारी के आते ही जनता की वाहवाही बटोरने के लिए यातायात व्यवस्था ठीक करने की बैठकें महज औपचारिकता पूरी करने के लिए हर पुलिस थाने में की जाती है। लागों की राय लेकर अधिकारियों द्वारा यातायात व्यवस्था सुधारने का आश्वासन बड़बोले अंदाज में दिया जाता है। बैठक के खत्म होते ही यातायात व्यवस्था सुधारने की कवायद टांय-टांय फिस हो जाती है। पूर्व में एसडीएम ओपी सोनी, महेन्द्र सिंह, नंदकुमारम भी बैठकों के माध्यम से यातायात व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए प्रयास कर चुके हैं, किंतु बैठकों के बाद स्थिति जस की तस रही। तात्कालीन एसडीएम प्रीति मैथिल ने भी इस परंपरा को आगे बढ़ाते हुए यातायात सुधारने के लिए एक बैठक बुलाई जिसमें पूर्व बैठकों की तरह औपचारिकताएं की गई।
इस पर भी नहीं है पुलिस का ध्यान
सड़क पर चलते समय दोपहिया वाहन चालक बेखौफ होकर मोबाईल पर बात करते नजर आते हैं। शहर की पुलिस इन पर लगाम लगाने में नाकाम है ड्राईविंग के समय मोबाईल पर बात करने से कई दुर्घटनाएं हो चुकी हैं फिर भी पुलिस प्रशासन ने इन घटनाओं से सबब नहीं लिया है। शायद पुलिस किसी बड़ी घटना के इंतजार में है।
बिगड़ी यातायात व्यवस्था लील चुकी है कई जानों को
नगर की बिगड़ी यातायात व्यवस्था की बलि वेदी पर नगर के कई प्रतिभावान युवा भेंट चढ़ चुके हैं, किंतु इन जवान मौतों के बाद भी प्रशासन हाथ पर हाथ धरे नई दुर्घटनाओं को आमंत्रित करता नजर आता है। पिछले 6 माहों में सड़क दुर्घटनाओं में लगभग 8 से भी अधिक मौतें हो चुकी हैं जिनमें साधारण सड़क दुर्घटनाओं की संख्या तो सैंकड़ों में पहुंच चुकी है। सागर गेट के पास पूना से अपने माता पिता के पास आए एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर, सर्वोदय चौराहे पर एक मेधावी छात्रा की स्कूटी पर तेज रफ्तार से जा रहे ट्रक ने इनकी इहलीला समाप्त कर दी। इसी तरह नगर के एक युवा बोरवेल संचालक दिलीप राजपूत एवं महाविद्यालय में विधायक प्रतिनिधि ललित विश्वकर्मा बदहाल यातायात व्यवस्था की बलि चढ़ चुके हैं। इसके बाद भी प्रशासनिक अधिकारी बैठकों तक ही सीमित रहे हैं।



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