सोमवार, 18 फ़रवरी 2013

कृषि मंडी में भ्रष्टाचार का बोलबाला, सरकारी गेंहूं खरीद रहे व्यापारी

बीना। जैसे कि उम्मीद जताई जा रही थी कि मंडी अध्यक्ष के चुनाव के बाद मंडी में अव्यवस्थाओं और भ्रष्टाचार का बोलबाला बढ़ जाएगा और व्यापारी खुलेआम किसानों का शोषण करने लगेंगे। लगभग यह बात अब धीरे-धीरे सही सिद्ध होने लगी है। मंडी सचिव की लापरवाही एवं नवनिर्वाचित मंडी अध्यक्ष के उपेक्षापूर्ण रवैए के चलते मंडी भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुकी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार कृषि मंडी बीना में लगभग 90 तुलावटी किसानों के अनाज की तौल का कार्य करते हैं। इनमें से लगभग 2 दर्जन तुलावटी ऐसे हैं जो कभी भी न तो तौल करते हैं और न ही इन्होनें कभी तौल का मग्गा पकड़ा है। ये तुलावटी मंडी में सक्रिय राजनैतिकों के संरक्षण के चलते अपने तुलावटी लायसेंस अन्य लोगों को ठेके पर दे देते हैं। ज्ञात हो कि तुलावटियों का लायसेंस कृषि मंडी सचिव द्वारा बनाया जाता है। प्रत्येक तुलावटी को एक बोरा तुलवाने पर 1.80 रुपए की राशि देय होती है। जो तुलावटी तौल कार्य न करके ठेके पर तौल का कार्य अपने लायसेंस के ऐवज में अन्य लोगों को देते हैं उनसे आधी राशि बसूल कर ली जाती है।


रोजनामचा में नहीं होते दस्तखत


मंडी के नियमानुसार तुलावटियों को तौल करने के साथ सेल बाउचर बंदी एवं रोजनामचा पर हस्ताक्षर करना अनिवार्य होता है। किंतु राजनैतिक संरक्षण प्राप्त तुलावटी एक साथ महिने भर के हस्ताक्षर करते हैं। मंडी सचिव को पूरी जानकारी होने के बाद भी इनके द्वारा ऐसे फर्जी तुलावटियों के विरूद्ध लायसेंस निरस्ती की कार्यवाही नहीं की जा रही है।


मंडी में ही बिक रहा सरकारी गेहूं


मंडी में ही स्थित वेयर हाऊस में जहां सरकारी दुकानों से बेचा जाने वाला आम जनता एवं गरीबों को बंटने वाला अनाज रखा जाता है। सहकारी समितियों के कर्ताधतार्ओं से मिलकर मंडी के व्यापारी यह गेंहंू खुलेआम खरीद रहे हैं। ट्रेक्टर मे भरकर शासकीय दुकानों को भेजा जाने वाला गेहंू मंडी गेट के बाहर निकाले बिना अंदर ही लगभग 5 से 8 रुपए प्रति किलो के मार्जिन से व्यापारी खरीद रहे हैं। चोरी से खरीदे इस ब्लेक के गेहूं को व्हाईट बनाने के लिए भोपाल से आर ओ कटवा लिए जाते हैं। जिससे मंडी सचिव से मिलकर व्यापारी आम जनता के हितों को भी चूना लगा रहे हैं।

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