सागर। आचार्य विद्यासागर महाराज के शिष्य क्षुल्लक ध्यानसागर महाराज ने कटरा जैन मंदिर के फर्श पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि तीन बातों को ध्यान में रखकर दोस्त बनाओ तो कभी नुकसान नहीं होगा। जिसकी बातों को सुनकर न थको, जो अपने स्वार्थ की खातिर स्वार्थ सिद्ध हो जाने पर आपको भूल जाए और पांच वर्ष तक जिसको आपने अच्छे तरीके से पहचाना हो वे ही दोस्त बनाने लायक है।
क्षुल्लक ध्यानसागर महाराज ने कहा जगत परिवर्तनशील है। सब कुछ बदलता रहता है। 20 वर्षों बाद सागर आया हूूँ। दुखी लोग साधुओं के पास आते है। कुछ अपने बच्चों को सुधारने के लिए, कुछ अपने बीमार परिजनो के स्वस्थ्य होने के लिए, कुछ रूका हुआ पैसा वापिस मिल जाए आदि कारणों से आते है। महाराज श्री ने कहा कि आज कौन दुखी नहीं है। कोई संबंध के कारण यहां वहां फसा हुआ है लेकिन यदि रास्ते में कोई अभावग्रस्त मिल जाए तो उसे एक क्षण की खुशी दे देना ही बहुत बड़ी बात है।
छोटो से अधिक अपेक्षा रखने पर संबंध कड़वे हो सकते है। यदि इंसान भूल न करे तो वह कैसे सीखेगा। विद्यार्थी जीवन में अलार्म सुनाई नहीं देता है। यदि पढ़ने वाले बच्चों को समय पर उठना है। तो वह घड़ी की बजाय अपना ध्यान लगाकर सोए तो वह समय पर उठ सकता है। सफलता के लिए रूचि और पुरूषार्थ की जरूरत होती है। महाराज श्री ने कहा किसी महत्वपूर्ण चीज को कैसे याद करे। तो उन्होंने कहा कि लाल कलर से लिखी जाने वाली चीज जल्दी याद हो जाती है। उन्होंने पढ़ने वाले बच्चों से आहवान किया कि पहले आंखो से फिर उच्चारण कर फिर आंख बंद कर और फिर लिखकर 4 बार ऐसा हो तो सब याद हो जाएगा। जो देते है वो पाते है। आप खुशी देंगे तो आपको खुशी मिलेगी।
विश्वास में धारणा रखने की आवश्यकता नहीं है। क्योंकि जो मैं करूगा वह मुझे प्राप्त हो जाएगा। दुखीराम को दुख मिलता है। दुखियों को सुख देना सीख लो आपका दिल सुखी हो जाएगा और जरूरतमंदो को दान देना सीख लो वह मानवता का सबसे सुंदर दान होगा। सब जीवो के पीछे करूणा का भाव होना चाहिए। मंदिर निकट है लेकिन लोगों के दिल निकट नहीं है। यदि लोगों के दिल निकट हो जाए तो चारों ओर खुशहाली छा जाएगी। प्रवचनों के पूर्व आचार्य श्री के चित्र का अनावरण नाथूराम पटना, राजकुमार मिनी, वीरेन्द्र मालथौन ने किया।
क्षुल्लक जी को श्रीफल भेंट करने का सौभाग्य मुकेश जैन ढाना, दिनेश बिलहरा, राकेश पिड़रूआ, संजय पायल, राजीव दिगम्बर, राजेश इलेक्ट्रिक, ऋषभ जैन, तरूण कोयला, आदि उपस्थित थे। इस अवसर पर ब्र. राकेश भैया ने महाराज श्री के बारे में श्रद्धालुओं को जानकारी दी। क्षुल्लक श्री ध्यानसागर महाराज इन दिनों अहमदाबाद से बिहार करते हुए इंदौर, भोपाल, सागर, दमोह, कटनी, सतना होकर प्रसिद्ध जैन तीर्थ क्षेत्र सम्मेद शिखरजी जा रहे है।




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