बीना। जब से बीना तहसीलदार के रूप में महेन्द्र गुप्ता बीना आए हैं तभी से तहसील कार्यालय में पेंडिंग फाईलों का भार बढ़ता चला जा रहा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार तहसीलदार अक्सर अपनी डाइस पर न बैठकर केबिन में बैठे रहते हैं। बीना तहसील में जन्म एवं मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाने वाले भटकते रहते हैं।
इसी तरह नामांतरण प्रकरणों के भी तहसीलदार के बाबुओं के पास ऊंचे-ऊंचे ढेर लग चुके हैं। प्रमाण पत्रों के लिए जांच आदेश के नोटिसों पर तहसीलदार पटवारियों के लिए अपने हस्ताक्षर भी नहीं कर रहे जिससे जन्म मृत्यु जैसे महत्वपूर्ण प्रमाण पत्र बनवाने में अनावश्यक बिलंब हो रहा है।
देते हैं गैर जिम्मेदराना वक्तव्य
आलम यह है कि तहसीलदार से जब प्रेस के लोग उनका पक्ष जानने के लिए संपर्क करते हैं तो वे सही तथ्यात्मक जानकारियां न देकर भ्रमित करने वाली जानकारियां देते हैं। पिछले दिनों एक किसान की निजी जमीन पर हो रहे अवैध उत्खनन को तहसीलदार महोदय द्वारा प्रेस को दिए अपने वक्तव्य में उचित ठहराया था। तहसीलदार का कहना था कि किसान अपनी निजी जमीन खुदवाए या कुछ भी करे उस पर उसका अधिकार होता है। जबकि भू राजस्व संहिता के अनुसार जमीन की एक मीटर की सतह तक ही भूमि मालिक का अधिकार होता है इसके नीचे की भूमि अथवा खनिजों पर शासन का अधिकार माना जाता है। तहसीलदार के ऐसे गैर जिम्मेदराना वक्तव्यों से न सिर्फ कानून का उल्लंघन हो रहा है अपितु अवैध उत्खनन करने वालों के हौंसले भी बुलंद हो रहे हैं।
ऐसे तहसीलदार से तो खाली कुर्सी भली।



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